योगी सरकार का बड़ा फैसला: 15 लाख शिक्षक-कर्मियों को निजी अस्पतालों में भी मिलेगा कैशलेस इलाज

प्रदेश के शिक्षा जगत से जुड़े लाखों लोगों को बड़ी राहत देते हुए entity[“politician”,”योगी आदित्यनाथ”,”uttar pradesh chief minister”] के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में तय किया गया कि अब बेसिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मी और उनके आश्रित परिवार सरकारी के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे।

यह सुविधा आयुष्मान भारत की तर्ज पर लागू होगी और इससे प्रदेशभर में करीब 15 लाख शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी लाभान्वित होंगे। योजना पर सरकार द्वारा लगभग 448 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा। इस फैसले की घोषणा शिक्षक दिवस-2025 पर की गई थी, जिस पर अब मंत्रिपरिषद ने औपचारिक मुहर लगा दी है।


कैबिनेट के फैसलों की जानकारी

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री entity[“politician”,”सुरेश कुमार खन्ना”,”uttar pradesh finance minister”] ने प्रेसवार्ता में बताया कि कैबिनेट बैठक में कुल 32 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 30 को स्वीकृति प्रदान की गई।


माध्यमिक शिक्षा से जुड़े कर्मियों को लाभ

माध्यमिक शिक्षा मंत्री entity[“politician”,”गुलाब देवी”,”uttar pradesh secondary education minister”] के अनुसार, योजना के तहत—

अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक (मानदेय व व्यावसायिक शिक्षा विशेषज्ञ सहित)

संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त अनुदानित व स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षक

माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षक

इन सभी को आईपीडी (अंत:रोगी विभाग) में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
इस श्रेणी में 2.97 लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे, जिस पर 89.25 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय होगा।


बेसिक शिक्षा परिषद के लिए भी बड़ी राहत

बेसिक शिक्षा मंत्री entity[“politician”,”संदीप सिंह”,”uttar pradesh basic education minister”] ने बताया कि—

बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक

शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डेन

प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइये

और उनके आश्रित भी योजना के दायरे में आएंगे। इससे 11.95 लाख से अधिक कर्मी लाभान्वित होंगे। सरकार प्रति कर्मी करीब ₹3000 वार्षिक प्रीमियम के हिसाब से 358.61 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च वहन करेगी।


सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी सुविधा

कैशलेस इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मानकों के अनुसार होंगी।

स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को वेरिफिकेशन के बाद योजना का लाभ मिलेगा। इसके लिए जिलों में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी।
हालांकि, जो लोग पहले से किसी अन्य केंद्रीय या राज्य स्वास्थ्य योजना (आयुष्मान भारत/मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना) से आच्छादित हैं, वे इसके पात्र नहीं होंगे।


शिक्षा जगत के लिए बड़ा संदेश

योगी सरकार का यह निर्णय शिक्षा जगत से जुड़े कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

— रॉयल शाइन टाइम्स

About The Author

Share the News