सिंधोरा थाना क्षेत्र में अवैध खनन का बोलबाला, पुलिस पर खनन माफियाओं से मिलीभगत के गंभीर आरोप

वाराणसी।
सिंधोरा थाना क्षेत्र में अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में दिन-रात धड़ल्ले से मिट्टी खनन किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार सिंधोरा थाना पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाना पुलिस खनन माफियाओं के इशारों पर काम कर रही है।

ठंड के मौसम में घने कोहरे के बीच भारी वाहनों की आवाजाही से किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। लोगों का सवाल है कि यदि खनन माफियाओं के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—थाना पुलिस की या खनन माफियाओं की?
इतना ही नहीं, क्षेत्र में खुलेआम हरे पेड़ों की कटाई और अवैध मिट्टी खनन किया जा रहा है। खनन इस कदर बेखौफ तरीके से हो रहा है कि तस्कर सड़कों पर खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं।

आरोप है कि जब खनन माफिया पुलिस को “जागने” का इशारा करते हैं तो पुलिस सक्रिय हो जाती है और जब “सोने” को कहते हैं तो आंखें मूंद लेती है। इससे यह संदेश जा रहा है कि पुलिस की ड्यूटी सरकार और कानून के लिए नहीं, बल्कि खनन माफियाओं के संरक्षण में निभाई जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि यदि रात 10 बजे के बाद प्रत्येक प्रमुख चौराहे पर सघन पुलिस चेकिंग की जाए, तो अवैध खनन पर काफी हद तक रोक लग सकती है। लेकिन ऐसा न होने के कारण न केवल अवैध खनन फल-फूल रहा है, बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खनन कार्य नियमानुसार और वैध अनुमति लेकर किया जाए, तो इससे सरकारी खजाने को लाभ हो सकता है। लेकिन वर्तमान में सिंधोरा थाना क्षेत्र में दर्जनों जेसीबी मशीनों द्वारा खुलेआम अवैध खुदाई की जा रही है, जिस पर पुलिस ने मानो आंखों पर पट्टी बांध रखी है।

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि थाने में तैनात एक सिपाही द्वारा ही खुलेआम खनन कार्य कराए जाने की चर्चा क्षेत्र में आम है। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इन आरोपों पर कब संज्ञान लेते हैं और सिंधोरा थाना क्षेत्र में अवैध खनन पर आखिर कब लगाम लगती है।

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