काशी ने रचा हरित इतिहास: एक घंटे में 2.51 लाख पौधे, चीन का रिकॉर्ड टूटा

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नया वैश्विक इतिहास रच दिया है। की अगुवाई में सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित वृहद पौधरोपण अभियान के तहत मात्र एक घंटे में 2,51,446 पौधों का सफल रोपण कर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया गया। इस उपलब्धि को ने आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक ऋषि नाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाण-पत्र सौंपते हुए नई उपलब्धि की घोषणा की।


चीन का रिकॉर्ड पीछे, काशी बनी नंबर वन

अब तक एक घंटे में सर्वाधिक पौधारोपण का रिकॉर्ड चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी के नाम था। 10 मार्च 2018 को लगाए गए 1,53,981 पौधों का रिकॉर्ड अब काशी ने बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है।

डोमरी क्षेत्र में मियावाकी तकनीक और व्यापक जनभागीदारी के माध्यम से 2.51 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया। पूरे अभियान की निगरानी ड्रोन कैमरों और डिजिटल गणना प्रणाली से की गई, जिसके बाद आधिकारिक घोषणा की गई।


60 गंगा घाटों की थीम पर विकसित ‘शहरी वन’

करीब 350 बीघा क्षेत्र में विकसित इस विशाल ‘शहरी वन’ को 60 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रमुख गंगा घाटों — दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, केदार, ललिता, शीतला आदि — पर रखा गया है।

हर सेक्टर में लगभग 4,000 पौधे लगाए गए हैं। इस वन में 27 देशी प्रजातियां शामिल हैं, जिनमें शीशम, अर्जुन, सागौन, बांस, आम, अमरूद, पपीता जैसे फलदार वृक्ष तथा अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय जैसी औषधीय प्रजातियां शामिल हैं।


जनभागीदारी का महाअभियान

इस ऐतिहासिक उपलब्धि में भारतीय सेना की विभिन्न इकाइयों, एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, सिविल डिफेंस, उत्तर प्रदेश पुलिस की पीएसी वाहिनियों, नमामि गंगे, वन विभाग, कृषि विभाग, डूडा, नगर निगम, काशी विद्यापीठ सहित कई शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं, एनसीसी और एनएसएस स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।


आधुनिक सिंचाई और मियावाकी तकनीक

जापानी वनस्पति वैज्ञानिक द्वारा विकसित मियावाकी तकनीक के तहत लगाए गए ये पौधे सामान्य वृक्षारोपण की तुलना में 10 गुना तेजी से विकसित होंगे। अनुमान है कि अगले 2–3 वर्षों में यह क्षेत्र घने ‘ऑक्सीजन बैंक’ के रूप में विकसित होगा।

पौधों की देखभाल के लिए 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन, 10 बोरवेल और 360 रेन गन सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिससे नियमित सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी।


महापौर का बयान

महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि की प्रेरणा और के मार्गदर्शन में काशी ने यह सिद्ध किया है कि वह परंपरा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार है। यह उपलब्धि पूरे शहर के लिए गर्व का विषय है।


यह ऐतिहासिक अभियान न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि काशी की वैश्विक पहचान को भी नई ऊंचाई प्रदान करता है।

रिपोर्ट: रॉयल शाइन टाइम्स

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