नियमों के उल्लंघन पर होगी BNS की धारा 282 के तहत कार्रवाई
वाराणसी। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ने गंगा में नाव/जलयान संचालन को लेकर विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। नियमों का उल्लंघन करने पर नाव चालक व नाव मालिक के खिलाफ की धारा 282 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहती है धारा 282 (BNS 2023)?
धारा 282 जलयान के लापरवाहीपूर्ण या जल्दबाजी में संचालन से संबंधित है। यदि किसी नाव या स्टीमर को इस प्रकार चलाया जाता है जिससे मानव जीवन या संपत्ति को खतरा हो, तो:
- अधिकतम 6 माह का कारावास,
- या 10,000 रुपये तक का जुर्माना,
- या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
यह प्रावधान सभी प्रकार के जलयानों पर लागू होता है।
नाव संचालन के लिए अनिवार्य नियम
- क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं।
- बिना लाइफ जैकेट के किसी भी यात्री को नाव पर न बैठाएं।
- नाव को तेज या अनियंत्रित गति से न चलाएं।
- अस्सी घाट से नमो घाट की ओर जाने वाली नावें दाहिनी ओर रेता साइड से चलें।
- नमो घाट से अस्सी घाट की ओर आने वाली नावें दाहिनी ओर घाट साइड से चलें।
- अत्यधिक धुआं छोड़ने वाली या खराब नाव का संचालन न करें।
- चलती नाव पर यात्रियों को खड़ा कर सेल्फी/फोटोग्राफी न कराएं।
- निर्धारित किराये से अधिक वसूली न करें।
- यात्रियों को चढ़ाने-उतारने में लापरवाही न बरतें।
- यात्रियों से अभद्रता या मारपीट न करें।
- नशे की हालत में नाव संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- बिना रजिस्ट्रेशन के नाव का संचालन न करें।
- प्रशासन द्वारा तय समय के बाद नाव संचालन न करें।
जल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उपरोक्त नियमों का पालन न करने पर नाव चालक और मालिक के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने नाव संचालकों से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें, ताकि गंगा में यात्रा सुरक्षित, सुव्यवस्थित और दुर्घटनारहित बनी रहे।

More Stories
अलर्ट मोड में
अतिक्रमण पर चला बुलडोज़र, चुरावनपुर का प्राचीन तालाब फिर लेगा नया रूपढाई बीघे क्षेत्रफल का जलस्रोत कब्जा मुक्त, पुनरुद्धार कार्य शुरू
चौड़ीकरण में तेज़ी