पिंडरा।
तहसील पिंडरा में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान ग्राम जगदीशपुर, गजेन्द्रा, रायतारा, विक्रमपुर, बेलवा, फत्तूपुर, रमई पट्टी एवं धरसौना से आए मुसहर समुदाय के महिला-पुरुष अपने मूलभूत अधिकारों की मांग को लेकर उप-जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे। समुदाय द्वारा घरौनी प्रमाण पत्र एवं भूमि आवंटन की मांग से संबंधित लिखित प्रार्थना पत्र सौंपने का प्रयास किया गया।
आरोप है कि उप-जिलाधिकारी पिंडरा प्रतिभा मिश्रा ने प्रार्थना पत्र लेने से इनकार कर दिया। प्रार्थना पत्र देने आई महिलाओं का आरोप है कि एसडीएम ने अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि “आप लोगों को घरौनी नहीं मिलेगा, बार-बार क्यों आ जाते हैं।” इस व्यवहार से समुदाय के लोगों में आक्रोश और निराशा फैल गई।
मौके पर मौजूद नट समुदाय संघर्ष समिति के कार्यकर्ता करन मुसहर एवं ज्योति प्रजापति द्वारा जब शांतिपूर्ण ढंग से समुदाय का पक्ष रखा गया, तो प्रशासन द्वारा यह कहते हुए उन्हें बैठा लिया गया कि वे लोगों को गुमराह कर रहे हैं। इसकी जानकारी मिलते ही वहां मौजूद महिला-पुरुष आक्रोशित हो उठे और “अगर अपने हक की बात करना अपराध है तो हमें भी गिरफ्तार किया जाए” के नारे लगाने लगे।
इसके बाद समुदाय के लोग एसडीएम कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से धरने पर बैठ गए और अपने साथियों के लौटने का इंतजार करने लगे। इसी दौरान फूलपुर थाने की महिला दरोगा एवं पुलिस कर्मियों द्वारा उन्हें कार्यालय गेट के बाहर कर दिया गया।
नट समुदाय संघर्ष समिति के संयोजक प्रेम कुमार नट ने बताया कि घरौनी प्रमाण पत्र एवं भूमि आवंटन संविधान प्रदत्त अधिकार हैं और इन्हें मांगना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को सोशल मीडिया के माध्यम से दी गई है, साथ ही जिलाधिकारी वाराणसी को ई-मेल भेजा गया है। इसके अलावा एससी-एसटी आयोग एवं मानवाधिकार आयोग को भी लिखित शिकायत प्रेषित की गई है।
वहीं इस संबंध में एसडीएम पिंडरा का कहना है कि लोग भीटा की जमीन पर घरौनी की मांग कर रहे हैं, जबकि घरौनी केवल आबादी की भूमि पर ही दी जाती है।

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