पिंडरा।
जवाहर नवोदय विद्यालय, गजोखर में विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध वैज्ञानिक एवं बौद्धिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित आयुर्वेद विज्ञान एवं चिकित्सा विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य नागेश कुमार मिश्रा ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) प्राचीन भारत के अनुभव, अवलोकन और वैज्ञानिक प्रयोगों पर आधारित ज्ञान का व्यवस्थित संग्रह है। इसे आधुनिक शिक्षा में समावेश कर भारत की सामूहिक बौद्धिक धरोहर को संरक्षित एवं पुनर्विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
व्याख्यान को संबोधित करते हुए चिकित्सा अधिकारी डॉ. मृत्युंजय द्विवेदी ने आयुर्वेद को केवल घरेलू नुस्खों तक सीमित न मानकर एक संपूर्ण वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के सिद्धांत आज की आधुनिक जीवनशैली में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।
सत्र के दौरान उन्होंने सर्वांगीण स्वास्थ्य—शरीर, मन एवं चेतना के संतुलन—पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए दिनचर्या और ऋतुचर्या के महत्व को समझाया। विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से परीक्षा काल में तनाव प्रबंधन एवं एकाग्रता बढ़ाने के प्राकृतिक उपायों पर भी बल दिया गया।
व्याख्यान के उपरांत आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने जड़ी-बूटियों के वैज्ञानिक प्रभाव एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्न पूछे। डॉ. द्विवेदी ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षक हरीशचंद्र यादव ने आभार व्यक्त किया।
व्याख्यान में श्रीमती पूजा पाल, विपिन यादव, आर्यन त्रिपाठी, अविनाश वर्मा सहित शिक्षकगण एवं छात्र उपस्थित रहे।

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