यूजीसी संशोधन अधिनियम के विरोध में पिंडरा तहसील के अधिवक्ता सड़कों परपिंडरा महोत्सव के बहिष्कार का भी किया ऐलान

वाराणसी। यूजीसी संशोधन अधिनियम को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहा विरोध अब सड़क पर उतर आया है। इस बिल के विरोध में बुधवार को पिंडरा तहसील के सवर्ण अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बिल को “काला कानून” बताया और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम प्रतिभा मिश्रा को सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी संशोधन अधिनियम वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। अधिवक्ताओं ने यह भी ऐलान किया कि वे आगामी पिंडरा महोत्सव का विरोध करेंगे।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि इस संशोधन से शिक्षण संस्थानों में एक वर्ग विशेष के छात्रों का शोषण होगा और सवर्ण छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि यह बिल विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शैक्षणिक माहौल को दूषित करेगा तथा समाज में वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संशोधन के जरिए उच्च वर्ग के छात्र-छात्राओं को दूषित मानसिकता के तहत अपराधी के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने यह सवाल भी उठाया कि यूजीसी संशोधन बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों की चुप्पी चिंताजनक है। अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार से शिक्षण संस्थानों के लिए बनाए गए इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई।

इस विरोध प्रदर्शन में अंकित मिश्रा, आलोक पाण्डेय, राजन सिंह, अश्वनी सिंह, श्याम सिंह, विजय शर्मा, संतोष सिंह, राजेश सिंह, नवीन सिंह, सरोज राय, अविनाश चौबे, सतीश पाण्डेय, अवनीश पाण्डेय सहित सैकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे।

— रॉयल शाइन टाइम्स

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