चिरईगांव (वाराणसी)।
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन ने एक नई और प्रभावी पहल शुरू की है। विकास खंड चिरईगांव के सभागार में मंगलवार को आयोजित बैठक में निर्णय लिया गया कि अब गांवों के राशन कोटेदार महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ने में सेतु की भूमिका निभाएंगे।
बैठक की मुख्य बातें
खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) छोटेलाल तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विकास खंड के सभी कोटेदारों एवं समूह सखियों ने प्रतिभाग किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पात्र एवं जरूरतमंद महिलाओं को सरकारी योजनाओं तथा स्वयं सहायता समूहों से मिलने वाले लाभों की जानकारी देना रहा।
कोटेदारों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी
बीडीओ छोटेलाल तिवारी ने कहा कि राशनकार्ड धारक महिलाएं हर माह राशन लेने के लिए कोटेदारों के पास आती हैं, जिससे कोटेदारों का उनसे सीधा संवाद होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोटेदारों को निर्देशित किया गया कि वे—
महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के लाभों की जानकारी दें
उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करें
समूह सखियों के साथ समन्वय बनाकर महिलाओं का पंजीकरण सुनिश्चित कराएं
बीडीओ ने कहा,
“हमारा लक्ष्य गांव की अंतिम महिला तक पहुंचना है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ाएंगी, बल्कि उनके परिवार के जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार होगा।”
आत्मनिर्भरता की ओर सशक्त कदम
इस पहल से उन महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा जो आर्थिक तंगी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, पशुपालन, छोटे व्यवसाय एवं अन्य लघु उद्योगों के लिए कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकेंगी। बैठक के अंत में सभी कोटेदारों एवं समूह सखियों ने इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।

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