सिर्फ फोटो सेशन तक सीमित है स्वच्छता अभियान ग्रामीणों के अनुसार, सफाई कर्मियों का कोई निश्चित समय नहीं है। वे अक्सर सुबह 11 से 12 बजे के बीच गाँव पहुँचते हैं और महज एक घंटे में ही (दोपहर 1 बजे तक) वापस चले जाते हैं। इस दौरान उनका मुख्य काम सफाई करना नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा जगहों पर खड़े होकर फोटो खिंचवाना होता है, ताकि अपनी हाजिरी पक्की कर सकें।
ग्रामीणों ने बयां किया अपना दर्द: गाँव के पंचायत सहायक सुनील समेत अन्य ग्रामीणों— पप्पू निषाद, पिंटू निषाद, बीरेंद्र और रघुनाथ ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है।
अशोक तिवारी श्याम सिंह सुनील (पंचायत सहायक): उन्होंने बताया कि सफाई कर्मियों की अनियमितता से व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
पप्पू और पिंटू निषाद: इनका कहना है कि सफाई कर्मी केवल खानापूर्ति करने आते हैं। नालियों और रास्तों पर पसरी गंदगी को देखकर भी वे अनजान बने रहते हैं।
बीरेंद्र और रघुनाथ: ग्रामीणों ने बताया कि “थक-हारकर अब हम खुद ही अपने हाथों से कचरा साफ करते हैं। अगर हम सफाई न करें, तो गाँव में रहना दूभर हो जाए।”
मुख्य बिंदु:
देरी से आगमन: सुबह 11-12 बजे आना और 1 बजे गायब हो जाना।
लापरवाही: सफाई के नाम पर केवल फोटो खींचकर उच्चाधिकारियों को गुमराह करना।
स्वयं सेवा: सरकारी तंत्र के फेल होने पर ग्रामीण खुद झाड़ू उठाने को मजबूर।
मोकलपुर के इन जागरूक ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि लापरवाह सफाई कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और गाँव की सफाई व्यवस्था को नियमित कराया जाए।

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