विश्व मानवाधिकार दिवस पर उत्तर प्रदेश के पहले DNT यूथ रिसोर्स सेंटर का उद्घाटन

विमुक्त व घुमंतू समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम

वाराणसी | 10 दिसम्बर 2025 (विश्व मानवाधिकार दिवस)
बेलवा नट बस्ती, तहसील पिंडरा, वाराणसी में विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रथम DNT (Denotified & Nomadic Tribes) Youth Resource Centre का विधिवत उद्घाटन किया गया। यह केंद्र नट समुदाय संघर्ष समिति (NSSS) और उड़ान ट्रस्ट के संयुक्त प्रयासों से स्थापित किया गया है।

इस ऐतिहासिक केंद्र का उद्घाटन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. संजय सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने इसे घुमंतू एवं विमुक्त समुदायों के युवाओं के लिए शिक्षा, नेतृत्व विकास और अधिकार–जागरूकता का सशक्त मंच बताया।


2010 से अधिकारों की लड़ाई

नट समुदाय संघर्ष समिति (NSSS) वर्ष 2010 से उत्तर प्रदेश की घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के साथ कार्य कर रही है। संगठन का उद्देश्य सदियों से उपेक्षित इन समुदायों के अधिकारों की रक्षा, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सामाजिक–आर्थिक सशक्तिकरण है।


DNT यूथ रिसोर्स सेंटर के उद्देश्य

यह केंद्र विशेष रूप से DNT समुदाय के युवाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित रहेगा, जिनमें प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • ऐतिहासिक जागरूकता: 1857 से वर्तमान तक DNT समुदाय के संघर्षपूर्ण इतिहास से युवाओं को अवगत कराना
  • कानूनी जानकारी: क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट (CTA) जैसे औपनिवेशिक काले कानूनों की जानकारी और अधिकारों के प्रति जागरूकता
  • युवा सशक्तिकरण: शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और नेतृत्व विकास में सहयोग

कार्यक्रम की विशेषताएँ

कार्यक्रम में सिसवा, औराँव, विक्रमपुर, हस्तिनापुर, जौनपुर, पिण्ड्राई और तिवारीपुर गांवों की मुसहर और दलित बस्तियों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

  • ज्योति प्रजापति ने प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किया।
  • प्रेम कुमार नट (अध्यक्ष, उड़ान ट्रस्ट) ने मानवाधिकार, DNT समुदाय के गौरवशाली इतिहास और एकजुटता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
  • एडवोकेट बब्लू मुसहर ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन अनुभव साझा करते हुए कहा—
    “एक लकड़ी टूट जाती है, लेकिन लकड़ियों का गट्ठर नहीं।”
    उन्होंने लोगों को बताया कि सरकारी प्रक्रियाओं में निरंतर आवेदन और संघर्ष से ही अधिकार मिलते हैं।
  • मोहम्मद मूसा आज़मी (अध्यक्ष, Asian Bridge India) ने शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर केंद्रित विचार रखे।

DNT समुदाय का इतिहास और संघर्ष

प्रेम नट ने बताया कि DNT समुदाय का इतिहास व्यापार, कला और सांस्कृतिक आदान–प्रदान से जुड़ा रहा है। बंजारा समुदाय द्वारा अनाज–नमक का परिवहन, गाड़िया लोहार द्वारा लोहे के औज़ारों का निर्माण और कालबेलिया समुदाय का नृत्य—जिसे यूनेस्को की मान्यता प्राप्त है—इसकी मिसाल हैं।

उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने 1871 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट लागू कर इन समुदायों को “जन्मजात अपराधी” घोषित किया। आवागमन प्रतिबंध, थाने में हाजिरी और अमानवीय व्यवहार जैसी परिस्थितियाँ झेलनी पड़ीं।
भारत की आज़ादी के बाद भी इन्हें तत्काल मुक्ति नहीं मिली। 31 अगस्त 1952 को CTA रद्द होने के बाद इन्हें विमुक्त जनजाति (Denotified Tribes) कहा गया।


ऐतिहासिक महत्व

प्रेम नट ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश का पहला DNT Youth Resource Centre है, जो युवाओं को—
अपने अधिकार समझने, अपने इतिहास को जानने और सशक्त भविष्य की ओर बढ़ने का मंच देगा 🌱


कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित

  • प्रेम कुमार नट – अध्यक्ष, उड़ान ट्रस्ट
  • मोहम्मद मूसा आज़मी – अध्यक्ष, Asian Bridge India
  • प्रो. डॉ. संजय सिंह – महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी
  • उड़ान ट्रस्ट टीम: सौरभ विश्वकर्मा, राहुल कुमार, करण कुमार, मीना देवी, नेहा पटेल, ज्योति प्रजापति, रिया गुप्ता, नंदिनी
  • वाराणसी आश्रम स्कूल के शिक्षकगण एवं MGKVP के MSW छात्र
  • समुदाय से: सोनी मुसहर, गुड्डी मुसहर, गीता मुसहर, पुष्पा मुसहर, गुडिया मुसहर, सितारा देवी, नगीना देवी, परमिला देवी सहित अनेक लोग

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