अधिवक्ताओं के तेवर भांप कर बैकफुट पर आया पुलिस प्रशासन

वाराणसी। रथ यात्रा चौराहे पर अधिवक्ता की पिटाई का मामला पुलिस प्रशासन के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर जिस तरीके का मामला गर्म है उसे देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरीके से बैक फुट पर आ गया है। कमिश्नरेट पुलिस के लिए राहत की बात यह रही कि दो दिनों तक कचहरी बंद रही लेकिन रविवार की रात जिस तरीके से न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर जिला जज के पोर्टिको पर धरने का ऐलान किया गया है उसे मामले को ठंडा करने की कोशिश शुरू हो गई है। इसी के तहत आरोपित इंस्पेक्टर क्राइम कन्हैया गोपाल को निलंबित कर दिया गया है और मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है।

लीपापोती की कोशिश भी हुई
पुलिस ने अपनी तरफ से इस मामले में लीपापोती की भी खूब कोशिश की। शर्मनाक वारदात के बाद जब लहू लुहान अधिवक्ता का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो पुलिस ने अपनी तरफ से एक वीडियो चलाने की कोशिश की। इसमें घायल अधिवक्ता को पुलिस के साथ बहस करते देखा जा सकता है। देखने से स्पष्ट है कि अपने पक्ष को मजबूत करने की खातिर कुछ अंश को दिखाया गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि ट्रैफिक रूल का उलझन भी किया था तो वाहन का चालान कर देते इस तरह निर्ममता पूर्वक पिटाई का अधिकार किस ने पुलिस को दिया है। पुलिस ने सारी हदें पार कर दी हैं और अधिवक्ताओं के खिलाफ उनका रवैया क्रूरतापूर्ण रहा है। इसी के विरोध में आज हड़ताल का आवाहन किया गया है।

अधिवक्ता से मारपीट करने वाले इंस्पेक्टर सस्पेंड

भेलूपुर के रथयात्रा चौराहे पर शनिवार रात पत्नी के साथ जा रहे अधिवक्ता शिव प्रताप सिंह को पीट कर रक्त रंजित करने के आरोपित इंस्पेक्टर कन्हैया गोपाल को निलंबित कर दिया गया है। अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) डीआइजी शिवहरि मीणा ने यह कार्रवाई की।

About The Author

Share the News