“समृद्ध भारत की परिकल्पना में उन्नत भारत अभियान की भूमिका” विषय पर शनिवार को उदय प्रताप महाविद्यालय के राजर्षि सेमिनार हाल में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, जैविक खेती और स्टार्टअप की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
मुख्य आकर्षण और वक्तव्य
रविन्द्र जायसवाल (स्टांप मंत्री, उत्तर प्रदेश) –
“भारत कृषि प्रधान देश है और अर्थव्यवस्था के विकास का रास्ता गाँव से होकर जाता है। यूपी सरकार की 22 और केंद्र की 9 योजनाएँ युवाओं को सब्सिडी और सहयोग दे रही हैं। जब हम आज़ादी का 100वाँ वर्ष मनाएँगे, भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में शीर्ष पर होगी।”
नितिन सिंह (SDM सदर) –
“ज्ञान के संवर्धन से ही समाज उन्नत हो सकता है। उन्नत भारत अभियान शिक्षा और ग्रामीण विकास के बीच सेतु का काम कर रहा है।”
डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह (प्राचार्य, उदय प्रताप महाविद्यालय) –
“ग्रामीण आहार एंटरप्राइजेज जैसी छात्र पहल ग्रामीणों को स्वरोजगार का अवसर दे रही है। जल संचय, जल निकासी और कचरा निस्तारण पर जागरूकता से गाँवों में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है।”
डॉ. शैल शंकर (आईआईटी बीएचयू) –
“उन्नत भारत अभियान शिक्षा और ग्रामीण विकास को जोड़ने वाला प्रभावी माध्यम है, जिसने BHU के आसपास के पाँच गाँवों में स्वच्छता, कृषि और उद्योगों में सुधार लाया।”
तकनीकी सत्र के मुख्य बिंदु
- जैविक खेती, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और मोती की वैज्ञानिक खेती को स्वरोजगार के नए अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- महिला सशक्तिकरण के लिए जूट-आधारित उत्पादों को आत्मनिर्भरता की कुंजी बताया गया।
- पर्यावरण संरक्षण, कार्बन न्यूट्रल बनने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर जोर दिया गया।
- 100 से अधिक छात्रों ने ग्रामीण विकास, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और स्टार्टअप पर अपने प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए, जबकि 50 से अधिक किसान और महिला उद्यमी भी जुड़े।
आयोजन और सहयोग
यह कार्यक्रम आरसीआई, उन्नत भारत अभियान, आईआईटी बीएचयू एवं उदय प्रताप महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का समन्वयन अभिषेक (प्रोग्राम मैनेजर, आईआईटी बीएचयू) ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. तुमुल सिंह (जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष) ने प्रस्तुत किया।
मुख्य संदेश
समृद्ध भारत की परिकल्पना तभी संभव है जब गाँव आत्मनिर्भर और जागरूक बनें।
युवा, किसान और महिलाएँ मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करें, तभी विश्वगुरु भारत का सपना साकार होगा।

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