वाराणसी के रामनगर में चल रही ऐतिहासिक रामलीला के चौथे दिन मंगलवार को ‘अष्ट सखी संवाद’ और ‘फुलवारी लीला’ का मंचन हुआ। बाबा तुलसीदास द्वारा वर्णित यह प्रसंग भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
आज की लीला में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर आते हैं। जनकपुर की बालिकाएं और सखियां दोनों राजकुमारों के रूप और व्यक्तित्व को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाती हैं। मंचन के दौरान कजरी, चैती, बिरहा जैसे लोकभाव और भक्ति-श्रृंगार रस से भरी चौपाइयों ने दर्शकों को त्रेतायुग का अनुभव कराया।
फुलवारी लीला का मुख्य आकर्षण
राम और सीता की पुष्प वाटिका में प्रथम भेंट को बेहद भावनात्मक और जीवंत ढंग से प्रस्तुत किया गया। कथा में सीता जी गौरी पूजन करती हैं और वर के रूप में राम को मांगती हैं। इस भावनात्मक प्रसंग पर पूरी रामलीला मैदान में भक्ति और भावनाओं की लहर दौड़ गई।
आज की आरती एक संत के कर-कमलों से संपन्न हुई। रामलीला के इस खास प्रसंग में भारी संख्या में श्रद्धालु, संत और स्थानीय लोग शामिल हुए।
रामनगर की रामलीला की यह विशेषता है कि हर पात्र, हर मंचन और हर प्रसंग दर्शकों को ऐसा अनुभव कराता है मानो वे त्रेतायुग की लीला का प्रत्यक्ष दर्शन कर रहे हों।

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