रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला का तीसरा दिन प्रभु श्रीराम के जन्म की पावन झांकी को समर्पित रहा।
राजा दशरथ द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ के उपरांत कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। भगवान श्रीराम के प्रकट होते ही अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा उठी और हर गली-मोहल्ले में मंगलगीत, सोहर और बधाइयाँ गूंजने लगीं।
मंचन के दौरान जब भगवान श्रीराम शिशुरूप में प्रकट होकर रोने लगे, तो पूरा वातावरण भावविभोर हो उठा। तत्पश्चात गुरु वशिष्ठ द्वारा राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का नामकरण संस्कार सम्पन्न किया गया।
जाल्हूपुर की रामलीला में भी रामजन्म की अद्भुत प्रस्तुति हुई। महिलाओं ने पारंपरिक सोहर गीतों “कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला” से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अनुपम रामजन्म की झांकी ने दर्शकों को भक्ति, आनंद और आस्था के सागर में डुबो दिया।

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