काशी विश्वनाथ धाम में हुई अहम बैठक, विकास व सुरक्षा को मिली नई दिशा

वाराणसी। 04 सितंबर 2025 को काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की 108वीं बैठक, काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद की 14वीं बैठक और काशी विश्वनाथ मंदिर कार्यपालक समिति की 64वीं बैठक मंडलायुक्त सभागार में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता मंडलायुक्त, वाराणसी मण्डल ने की। इसमें सदस्य सचिव एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण, प्रो. बिहारी लाल शर्मा (कुलपति, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय), प्रमुख सचिव न्याय के प्रतिनिधि बालाकृष्ण एन. रंजन, वित्त विभाग के प्रतिनिधि मुख्य कोषाधिकारी, अपर पुलिस उपायुक्त (सुरक्षा) कमिश्नरेट वाराणसी, तथा भारतीतीर्थ महास्वामी जी के प्रतिनिधि, जगद्गुरु शंकराचार्य महासंस्थानम् दक्षिणाम्नाय, शारदापीठम्, श्रृंगेरी (कर्नाटक) सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से अनुमोदन दिया गया। इनमें मिर्जापुर स्थित भूखंड पर वैदिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना, विशालाक्षी माता मंदिर तक श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुँच हेतु भवन क्रय, वैकल्पिक प्रसाद योजना के तहत लड्डू प्रसाद और रुद्राक्ष माला उपलब्ध कराना, संगम तीर्थ जल आदान-प्रदान योजना से समस्त ज्योतिर्लिंगों को जोड़ना, धाम की सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम व कैमरों का आधुनिकीकरण, दर्शनार्थी परिचय पत्र का नवीनीकरण, सारनाथ स्थित संकट हरण हनुमान मंदिर परिसर में गौशाला का आधुनिकीकरण, संस्कृत विद्यालयों को डीबीटी योजना के तहत वस्त्र, पुस्तकें और यूनिफार्म आदि हेतु आर्थिक सहायता, तथा दंडी सन्यासियों को प्रतिदिन प्रसाद व दक्षिणा देने का निर्णय शामिल रहा।

विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद और कार्यपालक समिति की बैठक में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें बैलेंस शीट का अनुमोदन, कार्मिकों का मानदेय औचित्यपूर्ण बनाना, धाम में अत्याधुनिक डिजिटल संग्रहालय स्थापित करने का प्रस्ताव, इम्पोरियम के रिक्त स्थलों का आवंटन, परिसंपत्तियों की किराया दरों का पुनरीक्षण, पूर्णकालिक कार्मिकों के महंगाई भत्ते में वृद्धि तथा परिषद द्वारा विकसित विशेषज्ञता और एसओपी को कंसल्टेंसी सेवाओं के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय शामिल रहा। परिषद ने तय किया कि तकनीकी समाधान और प्रबंधन सुविधाओं को इच्छुक संस्थाओं को शुल्क पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे आय में पारदर्शी वृद्धि और धाम का और अधिक आधुनिकीकरण संभव हो सकेगा।

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