वाराणसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में गुरुवार को अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति एवं पूर्व जिला जज शैलेन्द्र सक्सेना ने वर्ष 2001 में दर्ज कराए गए मुकदमे में गवाही दी। उनके बयान के बाद अभियुक्त राजेश चन्द्र पाठक की ओर से अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी ने जिरह की।
मामला वर्ष 2001 का है, जब रम्भा देवी ने शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि अभियुक्त ने उसकी पत्रावली गायब कर दी, जिससे उसे न्याय नहीं मिल पा रहा। तत्कालीन जिला जज शैलेन्द्र सक्सेना ने जांच कराई और प्रथम दृष्टया अभियुक्त को दोषी पाए जाने पर थाना कैंट, वाराणसी में तहरीर भेजकर अपराध संख्या-596/2001, धारा 409 आईपीसी में मुकदमा दर्ज कराया था।
विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हुआ और फिलहाल इस प्रकरण में गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

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