जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान विभाग प्रमुख प्रोफेसर वाई. काटो ने 2-3 जुलाई को वाराणसी स्थित अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान केंद्र – दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (ISARC) का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान की सीधी बुआई (DSR) तकनी पर कामों का गहन अवलोकन किया और किसानों से सीधे संवाद किया।
वैज्ञानिकों और किसानों से किया संवाद
आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह और वैज्ञानिकों ने प्रो. काटो का स्वागत करते हुए उन्हें DSR तकनीक की उपलब्धियों और संभावनाओं से अवगत कराया।
प्रो. काटो ने पनियारा गांव (वाराणसी) में किसानों से बात की और उनके अनुभव सुने।
किसानों ने बताया कि मशीन से की गई सीधी बुआई से:
- फसल जल्दी तैयार होती है
- पानी और मजदूरी दोनों की बचत होती है
- लागत घटती है और पैदावार बढ़ती है
प्रो. काटो ने वैज्ञानिकों के साथ बैठकर DSR को और अधिक प्रभावी और स्थायी बनाने के तरीकों पर चर्चा की।
प्रयोगशालाओं और तकनीक केंद्रों का दौरा
प्रो. काटो ने ISARC के विभिन्न प्रयोगशालाओं और शोध केंद्रों का दौरा किया, जिनमें शामिल थे:
- मैकेनाइजेशन हब
- रिमोट सेंसिंग व GIS लैब
- कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी लैब
- स्पीड ब्रीडिंग लैब
- प्लांट व सॉयल लैब
उन्होंने सराहना की कि आइसार्क की टीम उन्नत बीज, आधुनिक मशीनें और ट्रेनिंग के ज़रिए धान की खेती को आधुनिक और टिकाऊ बना रही है।
जापान का 10 वर्षों का अनुभव साझा किया
प्रो. काटो ने बताया कि टोक्यो विश्वविद्यालय ने DSR पर पिछले 10 वर्षों में बड़े स्तर पर शोध किया है।
“हमने सूखा-प्रतिरोधी किस्मों, कम जुताई, और बीज की सटीक गहराई पर शोध किया है। बीज अंकुरण का एक मॉडल भी विकसित किया गया है जो डीएसआर को और प्रभावी बनाता है।”
चंदौली के खेतों का दौरा और किसानों से संवाद
अपने दौरे के दूसरे दिन प्रो. काटो ने चंदौली जिले के डीएसआर खेतों का दौरा किया।
उन्होंने फिर किसानों से बातचीत की और DSR को लेकर उनकी समस्याएं, ज़रूरतें और सफलताएं जानीं।
किसानों ने बताया कि तकनीक से पानी और मेहनत की बचत हो रही है और फसल समय पर बोई जा रही है।
भविष्य की साझेदारी की उम्मीद
प्रो. काटो ने कहा कि
“किसानों की तकनीक अपनाने की इच्छा और प्रशिक्षण में सहयोग से DSR तकनीक को और आगे ले जाया जा सकता है।”
इस दो दिवसीय दौरे का समापन भारत-जापान की साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की आशा के साथ हुआ, ताकि धान की खेती को आसान, सस्ती और टिकाऊ बनाया जा सके और किसानों को सीधा लाभ मिले।

More Stories
Vasile Carare का काशी दौरा
बना देश का पहला सरकारी अस्पताल जहां शुरू हुई नॉन-सीटी रोबोटिक घुटना सर्जरी
दुबई कनेक्शन पर कानून का शिकंजा