पार्टी के भीतर ही टकराव: क्या योगी सरकार से दूरी बना रही है अपना दल

डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती के मौके पर ‘अपना दल (एस)’ में सियासी हलचल चरम पर रही। एक ओर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आशीष पटेल ने बागियों और सहयोगी दलों पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर ‘अपना मोर्चा’ बनाकर बागियों ने पार्टी पर असली उत्तराधिकारी होने का दावा किया।

सत्ता के भीतर असंतोष की आंच

डॉ. आशीष पटेल ने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि अपना दल (एस) को खत्म करने के लिए 1700 करोड़ की ताकत लगाई जा रही है। उन्होंने बिना नाम लिए बीजेपी और यूपी सरकार के प्रभावशाली चेहरों को कटघरे में खड़ा किया। उनके अनुसार, जब भी अनुप्रिया पटेल सामाजिक न्याय से जुड़ा कोई बड़ा निर्णय लाती हैं, उनके खिलाफ षड्यंत्र शुरू हो जाता है।

पीएम मोदी की तारीफ, योगी पर इशारे

अपने भाषण में आशीष पटेल ने लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ की लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बार-बार इशारों में निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पीठ पीछे छुरा घोंपने वालों को जवाब जरूर मिलेगा, लेकिन पार्टी अपनी मर्यादा नहीं तोड़ेगी।

बागियों का दावा – “हम ही असली अपना दल हैं”

वहीं दूसरी ओर, ‘अपना मोर्चा’ के संयोजक ब्रजेंद्र प्रताप सिंह और उनके साथियों ने खुद को एनडीए का सच्चा सहयोगी बताते हुए दावा किया कि अपना दल (एस) के 9 विधायक उनके संपर्क में हैं और दिल्ली से इशारा मिलते ही साथ आ जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि आशीष पटेल की तानाशाही और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की वजह से पार्टी में टूट हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुर्मी क्षत्रिय भवन में आयोजित उनका कार्यक्रम पार्टी नेतृत्व के दबाव में रद्द कराया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में क्या चल रहा है?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आशीष पटेल के आरोपों का सीधा निशाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है, न कि बीजेपी पर। उनका मानना है कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति में अपना दल (एस) का इस्तेमाल एक ‘औजार’ की तरह किया जा रहा है ताकि मुख्यमंत्री योगी की बढ़ती लोकप्रियता पर नियंत्रण रखा जा सके।

अपना दल कमजोर, तो सबसे बड़ा घाटा भाजपा को?

एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एनडीए के सबसे ताकतवर घटक दलों में ‘अपना दल (एस)’ शामिल है। पार्टी ने 2022 में 13 विधानसभा सीटें जीतीं। लेकिन अगर पार्टी टूटती है या कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर भाजपा के कुर्मी वोट बैंक पर पड़ेगा।

बागियों को मिला शासकीय संरक्षण?

अपना दल (एस) के प्रदेश अध्यक्ष आरपी गौतम ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखकर बागी नेताओं की पत्नियों और करीबी सहयोगियों को शासकीय पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग पार्टी से निष्कासित हैं, फिर भी उन्हें दोबारा मनोनीत किया गया है, जिससे पार्टी की गरिमा को ठेस पहुंची है।

अब आगे क्या?

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अनुप्रिया पटेल संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेंगी जबकि आशीष पटेल हमलावर रुख में बने रहेंगे। बीजेपी की ओर से कोई स्पष्ट रुख नहीं आने तक यह जोड़ी कोई ठोस निर्णय नहीं लेगी। फिलहाल सियासी मोर्चा खुल चुका है—अब देखना है कि यह सियासी संघर्ष सत्ता में साझेदारी की नई इबारत लिखेगा या ‘अपना दल’ के दो टुकड़े करेगा।

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