वाराणसी। नगर निगम की महत्वाकांक्षी “ग्रीन काशी” परियोजना अब तेजी से जमीन पर आकार लेती नजर आ रही है। डोमरी (सुजाबाद) क्षेत्र में लगभग 350 बीघा भूमि पर विकसित हो रहा यह विशाल मियावाकी वन शहर के पर्यावरणीय भविष्य को नई दिशा देने की ओर बढ़ रहा है।
महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने परियोजना स्थल का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान लगाए गए करीब 2.51 लाख पौधों की बेहतर जीवन दर और उनकी स्वस्थ वृद्धि पर संतोष व्यक्त किया गया।
पौधों की सुरक्षा पर विशेष जोर
महापौर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पौधों की देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। बढ़ती गर्मी को देखते हुए ग्रीन नेट लगाने और रेनगन सिस्टम से हाईटेक सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि पौधों को पर्याप्त सुरक्षा और पोषण मिल सके।
60 घाटों की थीम पर अनोखा विकास
इस परियोजना की खास बात इसका सांस्कृतिक स्वरूप है। पूरे वन क्षेत्र को काशी के प्रमुख घाटों—जैसे दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट और अस्सी घाट—के नाम पर अलग-अलग सेक्टरों में विकसित किया जा रहा है।
यहां शीशम, सागौन, अर्जुन जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ अश्वगंधा और गिलोय जैसे औषधीय पौधे भी लगाए गए हैं, जो पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
विश्व रिकॉर्ड के बाद सुरक्षा कड़ी
नगर निगम ने 1 मार्च को एक घंटे में 2,51,446 पौधे रोपकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। इस हरित संपदा की सुरक्षा के लिए 25 सीसीटीवी कैमरे, 20 हाईमास्ट लाइटें और 24 घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।
पर्यावरण के साथ रोजगार का भी अवसर
“ग्रीन काशी” परियोजना भविष्य में न केवल शहर को स्वच्छ हवा और ऑक्सीजन का बड़ा स्रोत देगी, बल्कि गंगा किनारे हरित पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।

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