गौ आश्रय स्थलों पर सख्ती: हर केंद्र में 10 कुंतल भूसा अनिवार्य, गर्मी से बचाव के निर्देश

वाराणसी। पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनैतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह ने गौवंश संरक्षण को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी गौ आश्रय स्थलों पर “भूसा बैंक” स्थापित किया जाए और प्रत्येक केंद्र में न्यूनतम 10 कुंतल भूसा उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा।

गर्मी से बचाव के लिए विशेष व्यवस्था

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बढ़ती गर्मी और लू से गौवंश को बचाने के लिए प्रभावी इंतजाम किए जाएं। इसके तहत शेड पर पर्दे लगाने, नियमित जल छिड़काव करने और ठंडक बनाए रखने के उपाय सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही पशुओं को स्वच्छ पेयजल, हरा चारा, साइलेज और पर्याप्त भूसा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

भूसा बैंक और फंड उपयोग पर निगरानी

सर्किट हाउस सभागार में आयोजित मंडलीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने भूसा खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया में कम दर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गौ आश्रय स्थलों के संचालन हेतु जारी धनराशि के दुरुपयोग पर सख्ती बरतने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा।
इसके साथ ही राज्य वित्त आयोग की धनराशि का उपयोग भी गौ आश्रय स्थलों के विकास में करने के निर्देश दिए गए।

नस्ल सुधार और आय बढ़ाने पर जोर

मंत्री ने कृत्रिम गर्भाधान और सेक्स सॉर्टेड सीमेन के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उनका कहना था कि पशुपालन के बिना किसानों की आय दोगुनी करना संभव नहीं है, इसलिए अधिक से अधिक किसानों को इस क्षेत्र से जोड़ा जाए।

चारागाह भूमि और जैविक उत्पादन पर फोकस

हरे चारे के उत्पादन को बढ़ाने के लिए चारागाह और गोचर भूमि को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही गोबर गैस प्लांट, वर्मी कंपोस्ट और अन्य जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, मुख्य विकास अधिकारी प्रकार कुमार सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने उद्यमियों और व्यापारियों से गौ आश्रय स्थलों के लिए अधिक से अधिक भूसा दान करने की अपील भी की।

रॉयल शाइन टाइम्स

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