सारनाथ के इतिहास में सुधार: ASI ने बाबू जगत सिंह की भूमिका को दी आधिकारिक मान्यता

वाराणसी। काशी के विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल सारनाथ से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक त्रुटि में अब सुधार कर दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि सारनाथ के पुरातात्विक महत्व को सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराए गए उत्खनन के बाद पहचान मिली थी।

एएसआई के इस निर्णय के बाद सारनाथ स्थित धर्मराजिका स्तूप के पास लगा पुराना शिलापट्ट हटाकर नया शिलापट्ट स्थापित किया गया है, जिसमें बाबू जगत सिंह की भूमिका को औपचारिक मान्यता दी गई है।

दस्तावेजों के आधार पर लिया गया निर्णय

जानकारी के अनुसार बाबू जगत सिंह के वंशज कई वर्षों से इस विषय में ऐतिहासिक दस्तावेज और प्रमाण एएसआई के समक्ष प्रस्तुत कर रहे थे। उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के अध्ययन के बाद एएसआई ने यह स्वीकार किया कि 18वीं शताब्दी के अंत में बाबू जगत सिंह ने ही सबसे पहले सारनाथ के पुरातात्विक महत्व को उजागर किया था

इतिहासकारों के अनुसार यह निर्णय इतिहास लेखन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबे समय से इस तथ्य को आधिकारिक मान्यता नहीं मिल पाई थी।

शोध समिति के प्रयासों से मिला परिणाम

जगत सिंह रॉयल फैमिली प्रोजेक्ट शोध समिति के संरक्षक तथा बाबू जगत सिंह के छठे वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने बताया कि इस ऐतिहासिक तथ्य को प्रमाणित करने के लिए वर्षों से प्रयास किए जा रहे थे। समिति द्वारा संबंधित सभी दस्तावेज एएसआई को उपलब्ध कराए गए, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि इस पहल में काशी के विद्वानों, विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और इतिहासकारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

इस संबंध में एएसआई के डायरेक्टर हेमासागर ए. नायक ने सारनाथ स्थित एएसआई के सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट को पत्र भेजकर निर्णय की जानकारी दी है।

इतिहासकारों का मानना है कि यह निर्णय काशी की ऐतिहासिक विरासत और सारनाथ के वास्तविक इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

About The Author

Share the News