बिजली निजीकरण विरोध आंदोलन का 377वाँ दिन: बनारस में बिजलीकर्मियों का संघर्ष तेज, 14 दिसंबर को राष्ट्रीय रणनीति की तैयारी

वाराणसी। बिजली निजीकरण के विरोध में वाराणसी के बिजली कर्मियों, पेंशनरों और संविदा कर्मचारियों का आंदोलन सोमवार को 377वें दिन भी जारी रहा। अधीक्षण अभियंता कार्यालय, सिगरा पर आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने बिजली निजीकरण, एलएमवी-10 उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर लगाने तथा संविदाकर्मियों की छंटनी के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 2000 में संयुक्त संघर्ष समिति और राज्य सरकार के बीच हुआ समझौता आज तक लागू नहीं किया गया है। उन्होंने स्मार्ट मीटर को उपभोक्ता हितों के विरुद्ध बताते हुए इसकी स्थापना तत्काल रोकने की मांग की।

संघर्ष समिति ने घोषणा की कि पेंशनरों और नियमित कर्मियों की समस्याओं को लेकर प्रबंध निदेशक को संयुक्त मांग-पत्र भेजा जाएगा। वहीं, संविदाकर्मियों की मनमानी छंटनी के विरोध में एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही प्रबंध निदेशक से मुलाकात करेगा। समिति ने चेतावनी दी कि संविदाकर्मियों की छंटनी से राजस्व वसूली, अनुरक्षण कार्य तथा हजारों परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा।

विद्युत वितरण निगमों के संभावित निजीकरण के विरोध में अब किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने भी बिजली कर्मियों के साथ संयुक्त मोर्चा बनाने पर सहमति जता दी है। इसी क्रम में 14 दिसंबर को दिल्ली में एक बड़ी बैठक प्रस्तावित है, जिसमें इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल–2025 के खिलाफ व्यापक रणनीति तय की जाएगी और आंदोलन के अगले चरण की घोषणा होगी।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि एक वर्ष से अधिक समय से बिजलीकर्मी निजीकरण के खिलाफ सड़क पर हैं। केंद्र सरकार द्वारा जारी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल–2025 का ड्राफ्ट ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण को और गति देता है, जिससे किसान, मजदूर और बिजली कर्मियों के संयुक्त राष्ट्रव्यापी आंदोलन की संभावना प्रबल हो गई है।

सभा को ए.के. सिंह, अतीन गांगुली, आर.के. वाही, अवधेश मिश्रा, ओ.पी. सिंह, अंकुर पाण्डेय, हेमंत श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह, अभिषेक शुक्ला, आशुतोष पाण्डेय, जिउतलाल, के.पी. दुबे, सुरेशचंद, राजेश श्रीवास्तव, गुलशन कुमार सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

— रॉयल शाइन टाइम्स पेपर के लिए खबर

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