पीडीडीयू नगर। वाराणसी से अलग होकर 1997 में जिला बने चंदौली में आज तक एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। करीब 21 लाख की आबादी वाला यह जिला हृदय उपचार के लिए पूरी तरह वाराणसी पर निर्भर है। स्थिति यह है कि इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर अब तक किसी स्तर से ठोस प्रयास नहीं किए गए।
जिला अस्पताल की ओपीडी में हर महीने दो हजार से अधिक, जबकि इमरजेंसी में 500 से ज्यादा हृदय रोगी पहुँचते हैं। सर्दियों के मौसम में यह संख्या इमरजेंसी में ही 800 के पार पहुंच जाती है। बावजूद इसके, जिले में कार्डियोलॉजी की मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
जिला भर में नहीं तैनात एक भी कार्डियोलॉजिस्ट
प्रदेश के आकांक्षात्मक जिलों में शामिल चंदौली में दो संयुक्त जिला चिकित्सालय, पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन कहीं भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। विशेषज्ञ न होने के कारण सभी गंभीर मरीजों को वाराणसी रेफर करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों से वाराणसी की दूरी 40 से 70 किलोमीटर के बीच है, जो आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए दूरी के साथ-साथ उपचार खर्च की दोहरी चुनौती बन जाती है।
कार्डियोलॉजी जांच सुविधाएं भी नदारद
जिला अस्पताल में ईसीजी के अलावा कार्डियोलॉजी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जांचें उपलब्ध नहीं हैं। कई बार पद सृजित करने और नियुक्ति के प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मौसम बदलने से बढ़ रहा खतरा
नवंबर के अंतिम सप्ताह में दिन में धूप और शाम को अचानक बढ़ती ठंड से तापमान में 4 से 6 डिग्री तक का अंतर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड में रक्त गाढ़ा हो जाता है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी
ठंड में हृदय रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार तेज बुखार, खांसी, सांस फूलना, छाती में दर्द और खून जमने जैसी समस्याएं इस मौसम में तेजी से बढ़ती हैं।

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