रावण पर भगवान श्रीराम की विजय के उपलक्ष्य में रामनगर में परंपरागत उल्लास और आस्था का माहौल देखने को मिला। काशीराज परिवार के उत्तराधिकारी कुंवर अनंत नारायण सिंह का पारंपरिक विजय जुलूस पूरे शाही ठाठ और वैभव के साथ निकला।
दोपहर 2:30 बजे रामनगर किले में विजय दिवस समारोह की शुरुआत हुई। जैसे ही कुंवर अनंत नारायण सिंह बाहर आए, 36वीं वाहिनी के जवानों ने उन्हें सलामी दी और किले के बैंड दल ने सलामी धुन बजाई। इसके उपरांत ब्राह्मणों के दल ने शस्त्र पूजन कराया, जिसमें अस्त्र-शस्त्र, हाथी, घोड़े तथा अन्य पारंपरिक सामग्री की पूजा की गई।
शाही परंपरा के अनुसार, किले स्थित काली मंदिर में पालकी पूजन के बाद करीब शाम 5:02 बजे शाही काफिला किले से बाहर निकला। विजय जुलूस में सबसे आगे हाथी पर सवार होकर बनारस स्टेट के प्रतिनिधि राम कृष्ण बघेल नेतृत्व कर रहे थे। परंपरागत शाही वेशभूषा में कुंवर अनंत नारायण सिंह की सवारी ने लोगों का दिल जीत लिया।
जुलूस के मार्ग में हर-हर महादेव के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। रास्ते के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु अपने राजा की एक झलक पाने को उत्साहित नज़र आए। बटाऊ बीर पहुंचने पर कुंवर ने समी वृक्ष का पूजन किया और शांति के प्रतीक कबूतर छोड़े। अंततः शाही काफिला लंका मैदान पहुंचा, जहां संध्या पूजन के उपरांत कुंवर वापस किले लौट आए।
यह पारंपरिक विजय जुलूस न केवल आस्था और उत्सव का प्रतीक है, बल्कि काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत करता है।

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