इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यूपी सरकार को एक एतिहासिक निर्देश जारी किया है। अदालत ने पुलिस रिकॉर्ड और एफआईआर में जाति का उल्लेख तत्काल प्रभाव से खत्म करने के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने टिप्पणी की कि जातिगत महिमामंडन संवैधानिक नैतिकता के खिलाफ है और यह राष्ट्र-विरोधी प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है। अदालत ने कहा कि संविधान के प्रति आस्था और उसकी मर्यादा ही देशभक्ति का सर्वोच्च रूप और राष्ट्रीय सेवा की सबसे सच्ची अभिव्यक्ति है।
हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों और साइनबोर्ड से भी जातिगत संदर्भों को हटाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यूपी सरकार से एफआईआर के फॉर्मेट और पुलिस रिकॉर्ड में भी तत्काल बदलाव करने को कहा।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जातिगत पहचान या गौरव का प्रदर्शन राष्ट्रहित के खिलाफ है। यह निर्णय न केवल यूपी में बल्कि पूरे देश में प्रशासनिक और कानूनी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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