भोजपुरी हिंदी के विकास की आधार भाषा: राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला

राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी सम्मान समारोह में पुस्तकों का हुआ विमोचन

पिंडरा। तेलंगाना के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला ने कहा कि भोजपुरी हिंदी भाषा के विकास की आधारशिला है। भोजपुरी बोलने वालों की संख्या काफी अधिक होने के बावजूद भाषा विवाद के चलते इसे अब तक अपेक्षित क्षेत्रीय मान्यता नहीं मिल सकी है।

शनिवार को बनारस पब्लिक स्कूल में तथागत संस्था द्वारा आयोजित राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी तथागत सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि साहित्य का उद्देश्य सम्मान देना और सृजनशीलता को प्रोत्साहित करना है। ऐसे आयोजनों से न केवल साहित्यकारों को ऊर्जा मिलती है, बल्कि नई प्रतिभाओं को भी मंच और प्रेरणा प्राप्त होती है।

राज्यपाल ने कहा कि बोली हमारी जीवन पद्धति है, जबकि भाषा हमारे संस्कारों की पहचान होती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मॉरीशस में भोजपुरी को दूसरी राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है, जबकि भारत में इसे अभी वह सम्मान नहीं मिल सका है जिसकी यह हकदार है। उन्होंने काशी की साहित्यिक परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि तुलसीदास, कबीर और राहुल सांकृत्यायन जैसे महान साहित्यकारों की धरती आज भी शोध और प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।

कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् और माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत और संगीतमय योग की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया।

समारोह में बलदेव पीजी कॉलेज, बड़ागांव के प्राचार्य एवं साहित्यकार डॉ. प्रकाश उदय पांडेय को उनकी कृति ‘अरज निहोरा’ के लिए 51 हजार रुपये की राशि के साथ राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं भोजपुरी शब्दकोश के लेखक चंद्रशेखर परवाना को तथागत लोकभाषा व्याकरण सम्मान के तहत 21 हजार रुपये की नगद राशि देकर सम्मानित किया गया।

इसके अलावा तथागत पांडुलिपि प्रकाशन योजना के अंतर्गत चयनित चार पुस्तकों— प्रतिभा सिंह की ‘जब नेह का धागा टूटे’, आकृति विज्ञा अर्पण की ‘ललमुनिया’, लालबहादुर चौरसिया की ‘चुभे लागल बरगद के छांव’ तथा रामवचन यादव की ‘अंगूठा कहत हमार बा’—का राज्यपाल द्वारा विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में तथागत संस्था के संरक्षक एवं पूर्व आईएएस डॉ. एन.पी. सिंह ने स्वागत भाषण दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन डॉ. सदानंद शाही ने दिया, जबकि संचालन डॉ. गोपाल यादव ने किया। साहित्यकार सीमा पांडेय ने भी विचार रखे और धन्यवाद ज्ञापन तथागत ट्रस्ट की अध्यक्षा बिंदु सिंह ने किया।

इस अवसर पर साहित्यकार प्रदीप शुक्ला, देवकृष्ण शर्मा, ए.के. शुक्ला, डॉ. बलधारी यादव, कन्हैयालाल, भागीरथी यादव, अरुणेंद्र सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

About The Author

Share the News