यूपी में ‘सारस सर्किट’ की तैयारी: मैनपुरी-इटावा के वेटलैंड्स में बढ़ेगा इको-टूरिज्म और सारस संरक्षण

लखनऊ/मैनपुरी। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के राजकीय पक्षी Sarus Crane के संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए ‘सारस सर्किट’ विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। यह सर्किट मुख्य रूप से Mainpuri और Etawah जिलों के प्रमुख वेटलैंड क्षेत्रों में तैयार किया जाएगा। इससे पक्षी संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

परियोजना के तहत मैनपुरी के किर्थुआ, सहस, कुर्रा जरावां, सौज और समन क्षेत्रों के साथ-साथ इटावा के Sarsai Nawar Wetland और Paroli Ramayan Wetland को सारस सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। इन स्थानों पर सारस पक्षी के प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटकों के लिए इको-टूरिज्म गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

इस परियोजना का विकास Uttar Pradesh Forest Department और Uttar Pradesh Eco Tourism Development Board के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत वेटलैंड्स, तालाबों और उथले जलाशयों को संरक्षित कर उन्हें सारस पक्षी के अनुकूल बनाया जाएगा, ताकि इन क्षेत्रों में पक्षियों की संख्या और जैव विविधता सुरक्षित रह सके।

टूरिस्ट सुविधाओं का भी होगा विकास

सारस सर्किट में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें प्रवेश द्वार, व्यू प्वाइंट, डेक और बोटिंग स्पॉट, बटरफ्लाई गार्डन, सोलर लाइटिंग, इंटरप्रिटेशन सेंटर और पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

इसके अलावा पर्यटकों के लिए सूचना केंद्र, ईको-टॉयलेट ब्लॉक, इंटरैक्टिव साइनेज, फूड कियोस्क और ओडीओपी व स्मृति-चिन्ह की दुकानें भी स्थापित की जाएंगी।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ेगी जागरूकता

सारस सर्किट के विकास से न केवल सारस पक्षी बल्कि Grey Heron और Asian Openbill Stork जैसे अन्य पक्षियों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। वेटलैंड्स के संरक्षण से भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

इस पहल से स्थानीय समुदाय को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे, जबकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

(रॉयल शाइन टाइम्स)

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