पिंडरा तहसील अंतर्गत फूलपुर थाना क्षेत्र के मंगारी गांव में चल रहा भूमि विवाद बुधवार को और उग्र हो गया। प्रशासन द्वारा कब्रिस्तान के वैकल्पिक स्थल के रूप में हिंदू धार्मिक स्थल के समीप की भूमि को चिन्हित किए जाने की कोशिश से ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई। पैमाइश के लिए पहुंचे नायब तहसीलदार कोलअसला राधेश्याम का ग्रामीणों ने घेराव कर विरोध जताया।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि को कब्रिस्तान के लिए चुना जा रहा है, वह गांव की सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्था से जुड़ी है। यहां किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा। ग्रामीणों ने बताया कि एयरपोर्ट विस्तार की जद में आए प्राचीन कब्रिस्तान के स्थान पर प्रशासन नई जमीन की तलाश कर रहा है। इसी क्रम में राजस्व टीम के साथ नायब तहसीलदार मंगारी गांव पहुंचे और जैसे ही पैमाइश शुरू हुई, सैकड़ों की संख्या में महिलाएं व पुरुष मौके पर एकत्र हो गए। देखते ही देखते नारेबाजी शुरू हो गई और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर ऐसी भूमि का चयन कर रहा है, जहां वर्षों से धार्मिक एवं सार्वजनिक गतिविधियां संचालित होती आ रही हैं।
जीउतिया माता स्थल व होलिका दहन का स्थान
ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित भूमि पर जीउतिया माता का प्राचीन पूजा स्थल स्थित है। इसी स्थान पर हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है और गांव में किसी की मृत्यु के बाद श्राद्ध कर्म की परंपरा भी यहीं निभाई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि एक समस्या के समाधान के नाम पर प्रशासन दूसरा गंभीर विवाद खड़ा कर रहा है।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि उक्त भूमि पर सरकारी कूड़ा घर और हैंडपंप पहले से स्थापित हैं, जिससे इसके सार्वजनिक उपयोग का स्पष्ट प्रमाण मिलता है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य श्याम मोहन बाबू, ग्राम प्रधान विजय पटेल उर्फ खुटखुट, व्यापार मंडल अध्यक्ष पप्पू सिंह और पूर्व ग्राम प्रधान कविंद्र पटेल ने कहा कि ग्रामीण एयरपोर्ट विस्तार के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उनकी धार्मिक आस्था और सार्वजनिक हितों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विरोध प्रदर्शन में व्यापार मंडल अध्यक्ष पप्पू सिंह, बीडीसी श्याम मोहन बाबू, शिव शंकर पटेल, विनोद पटेल, जितेंद्र, खरवारु खुशहाल, सुधाकर, जयनाथ पटेल, संतोष, विवेक, अजय, विनोद, गोरखनाथ, जगदीश बरनवाल, राम जी, महेंद्र पटेल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। ग्रामीणों के कड़े रुख और बढ़ते हंगामे को देखते हुए प्रशासनिक टीम को बिना पैमाइश किए ही वापस लौटना पड़ा।
रॉयल शाइन टाइम्स

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