सारनाथ, वाराणसी।
सारनाथ स्थित में सोमवार, 19 जनवरी को एनसीएफएसई–2023 के आलोक में शिक्षण शास्त्र एवं मूल्यांकन विषयक एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व डायट प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला ने किया।
सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. विनोद पाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, यू.पी. कॉलेज तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद, असिस्टेंट प्रोफेसर, बी.एड. विभाग, , वाराणसी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने एनसीएफएसई–2023 के अंतर्गत शिक्षा शास्त्र पर आधारित पाठ्यक्रम संरचना, आकलन की अवधारणा, दार्शनिक आधार, मूल्यांकन उपकरण एवं नीतिगत पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न रखकर लोकतंत्र, समानता, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता का सशक्त आधार बनाया जाना चाहिए। एनसीएफएसई–2023 इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार की स्पष्ट दिशा निर्धारित करता है।
सेमिनार के दौरान प्रतिभागी शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए अपने अनुभव, विचार और सुझाव साझा किए। बृहद चिंतन–विमर्श के उपरांत एनसीएफएसई–2023 की उपयोगिता एवं सार्थकता पर गहन चर्चा की गई तथा इसके प्रावधानों को व्यवहारिक रूप से विद्यालयी शिक्षा में लागू करने हेतु सतत प्रयास पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का समापन शिक्षण प्रक्रिया को अधिक समावेशी, मूल्यपरक एवं छात्र–केंद्रित बनाने के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर डायट प्रवक्ता लालधारी यादव, नरसिंह मौर्य, गोविन्द चौबे, अखिलेश्वर गुप्ता, कुंवर भगत सिंह, शालिनी उपाध्याय, नीलिमा राय, अनुज श्रीवास्तव सहित लगभग 75 अध्यापक उपस्थित रहे।
— रॉयल शाइन टाइम्स

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