वाराणसी।
गुरुवार की सुबह काशी पर घना कोहरा छाया रहा। शीतल धुंध के बीच दिव्यता की अलौकिक छवि में नजर आया। कोहरे की आगोश में लिपटा मंदिर परिसर ऐसा प्रतीत हुआ मानो बाबा विश्वनाथ स्वयं अपने भक्तों को शीतल धुंध में आशीर्वाद दे रहे हों।
जहाँ कोहरा—वहाँ रहस्य,
जहाँ काशी—वहाँ आस्था,
और जहाँ बाबा विश्वनाथ—वहाँ शाश्वत चेतना।
सदियों से मोक्षदायिनी में स्थित बाबा का धाम हर मौसम और हर काल में श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति देता आया है। ठंड की इस सुबह में काशी की गलियाँ, घाट और मंदिर परिसर अध्यात्म से सराबोर दिखे—एक ऐसा दृश्य जिसने मन को ठहराव, श्रद्धा और शांति से भर दिया।
रॉयल शाइन टाइम्स पेपर के लिए खबर

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