बनारस की बेटियों के हौसले की जीवंत मिसाल बनीं ‘162 किक गर्ल’
वाराणसी।
“मुझे ताइक्वांडो में कुछ खास और अलग करने की ललक थी। इसलिए हरहुआ के सभईपुर गांव से साइकिल चलाकर अकथा स्थित स्वामी विवेकानंद नगर कॉलोनी तक अभ्यास के लिए जाती थी। जब 162 डोलियो किक का रिकॉर्ड बना, तो खुद को यकीन नहीं हुआ… सराहना मिली तो आंखें भर आईं।”
यह शब्द हैं वाराणसी के छोटे से गांव सभईपुर (घमहापुर) की रहने वाली अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी किरन सिंह के, जिनकी कहानी आज संघर्ष, साधना और सफलता का प्रतीक बन चुकी है।
साइकिल से सपनों तक का सफर
किरन सिंह ने आठ वर्ष पहले अपने स्कूल में बच्चों को ताइक्वांडो खेलते देखा और तभी उनके मन में भी इस खेल को सीखने की इच्छा जागी। कोच सौरभ सिंह ने उनकी प्रतिभा पहचानी, जबकि सीमित संसाधनों के बावजूद पिता हरिश्चंद्र सिंह ने खेल किट की व्यवस्था की।
किरन रोजाना पांच से छह घंटे अभ्यास करती थीं। बीआर फाउंडेशन में प्रशिक्षण के लिए वह प्रतिदिन लगभग 40 किलोमीटर साइकिल से सफर करती थीं।
पिता का त्याग, मां का संबल
किरन के पिता हरिश्चंद्र सिंह पेशे से ड्राइवर हैं। वह बताते हैं,
“अफसरों के बच्चों को स्कूल छोड़ते वक्त सोचता था कि मेरे बच्चे भी कुछ अलग करें। इसलिए अपनी जरूरतों पर कटौती की, कभी नशे को हाथ नहीं लगाया।”
इस संघर्ष में उनकी पत्नी राजकुमारी ने भी हर कदम पर साथ दिया। आज तीन बेटियों और दो बेटों की उपलब्धियां पूरे परिवार का गौरव हैं।
162 किक से रचा इतिहास
साल 2025 किरन सिंह के करियर का ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ। उन्होंने मात्र 3 मिनट में लगातार 162 डोलियो किक लगाकर
निर्भया ग्रेटेस्ट रिकॉर्ड
वर्ल्ड ग्रेटेस्ट रिकॉर्ड
अपने नाम किए।
इसके पहले, 9 अगस्त 2022 को उन्होंने केवल 19 मिनट 46 सेकेंड में सुई-धागे से भारत का नक्शा बनाकर एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था।
शिक्षा, खेल और अनुशासन का संगम
किरन सिंह बीपीएड (शारीरिक शिक्षा) से स्नातक हैं, ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हैं और राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक भी जीत चुकी हैं। खेल के साथ-साथ उनकी सृजनात्मक प्रतिभा भी उन्हें विशिष्ट बनाती है।
गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल
किरन अपनी सफलता का श्रेय बीआर फाउंडेशन की संस्थापक और प्रख्यात चित्रकार पूनम राय को देती हैं।
किरन बताती हैं,
“शुरुआत में 20 किक के बाद ही थक जाती थी, लेकिन पूनम दीदी के विश्वास ने मुझे खुद पर भरोसा करना सिखाया।”
गौरतलब है कि पूनम राय स्वयं चार बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुकी हैं।
शादी के बाद भी नहीं टूटा हौसला
शादी के बाद भटपुरवा निवासी पति सर्वेश कुमार (पुलिस विभाग) और ससुराल वालों ने किरन के सपनों को पूरा समर्थन दिया।
आज वह घर की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ एक शिक्षण संस्थान में ताइक्वांडो प्रशिक्षक हैं और बीआर फाउंडेशन में बच्चों को नि:शुल्क प्रशिक्षण भी देती हैं।
सम्मान समारोह में गूंजा गर्व
रविवार को बीआर फाउंडेशन में आयोजित सम्मान समारोह में किरन सिंह को मेडल देकर सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने कहा,
“किरन सिंह की सफलता हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों से डर जाती है।”
समारोह में शिक्षिका ऋचा सिंह, नरेश कुमार राय, अनुष्का मौर्य सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। परिवारजनों की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।
सपना और संदेश
किरन सिंह का सपना है कि वह अपना हुनर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रस्तुत करें।
वह आत्मविश्वास से कहती हैं—
“बेटियां कमजोर नहीं होतीं। वे घर संभालने के साथ-साथ दुनिया में देश का नाम भी रोशन कर सकती हैं।”
किरन सिंह की यह यात्रा साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो अभाव भी रास्ता नहीं रोक सकते।

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