वाराणसी पुलिस ने 5 आरोपियों को दबोचा, फर्जी फर्मों से करोड़ों का अवैध लेन-देन

वाराणसी।
कोडीन युक्त कफ सिरप की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का वाराणसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। रोहनिया और सारनाथ थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी (शेल) फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार संचालित कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि कफ सिरप को अवैध रूप से बांग्लादेश भेजा जाता था और वहां से प्राप्त ब्लैक मनी को हवाला नेटवर्क के जरिए भारत लाकर बैंक खातों में खपाया जाता था।

पुलिस के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का संचालन शुभम जायसवाल के निर्देशन में किया जा रहा था, जबकि प्रतीक गुजराती हवाला के माध्यम से काली कमाई को सफेद करने की अहम भूमिका निभा रहा था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ बड़ा खुलासा

पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में एडीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि इस मामले की शुरुआत नवंबर माह में रोहनिया थाना क्षेत्र से हुई थी, जब भदवार स्थित एक गोदाम से भारी मात्रा में अवैध कफ सिरप बरामद किया गया था।

शुरुआती बरामदगी

PHENEDYL 100 ML – 18,600 शीशियां

ESKUF 100 ML – 75,150 शीशियां
कुल – 93,750 शीशियां

इस कार्रवाई के दौरान मौके से आजाद जायसवाल को गिरफ्तार किया गया था, जिसने पूछताछ में पूरे सिंडिकेट की परतें खोल दीं।

फर्जी फर्मों से चलता था करोड़ों का खेल

जांच में सामने आया कि चंदौली स्थित सिंह मेडिकोस, अलउकबा मेडिकल एजेंसी और एसपी फार्मा नामक तीन फर्में सिर्फ कागजों पर संचालित थीं। एक कमरे में कुर्सी–मेज रखकर फोटो खिंचवाकर GST नंबर लिया गया, जबकि वहां कभी दवाओं का वास्तविक कारोबार नहीं हुआ।

इन फर्मों के जरिए कफ सिरप की कागजी खरीद–फरोख्त दिखाई जाती थी, जबकि असली माल को गुप्त ठिकानों पर स्टोर कर बांग्लादेश भेजा जाता था।

हवाला नेटवर्क से भारत लौटती थी ब्लैक मनी

पुलिस के अनुसार, बांग्लादेश से आने वाली नकद रकम को बैगों में भरकर दवा मंडी सप्तसागर लाया जाता था। इसके बाद करोड़ों रुपये बैंक ऑफ महाराष्ट्र (नीचीबाग) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में नकद जमा कराए जाते थे, जिसे बाद में RTGS के जरिए शैली ट्रेडर्स (शुभम जायसवाल की फर्म) के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था।

गिरफ्तार आरोपी

रोहनिया पुलिस द्वारा गिरफ्तार (03)

1. स्वप्निल केसरी – निवासी मुगलसराय, चंदौली

2. दिनेश कुमार यादव – निवासी मैदागिन, वाराणसी

3. आशीष यादव – निवासी ईश्वरगंगी, वाराणसी

सारनाथ पुलिस द्वारा गिरफ्तार (02)

4. विष्णु कुमार पांडेय – निवासी सारनाथ, वाराणसी

5. लोकेश अग्रवाल – निवासी महमूरगंज, थाना सिगरा, वाराणसी

सारनाथ केस में नया एंगल

एडीसीपी ने बताया कि सारनाथ पुलिस द्वारा 27 दिसंबर को दर्ज मुकदमे में विष्णु कुमार पांडेय और लोकेश अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि लोकेश अग्रवाल, लोकेश फार्मास्यूटिकल का मालिक है और पहले भी हापुड़ के कफ सिरप कांड में उसका नाम सामने आ चुका है। वह तस्करी में फंसे लोगों को बचाने और हवाला नेटवर्क को मैनेज करने का काम करता था।

जांच जारी, और बड़े नामों की आशंका

पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क केवल वाराणसी तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां, संपत्ति जब्ती और बैंक खातों की जांच की जाएगी।

निष्कर्ष

फर्जी फर्में, कोड भाषा, हवाला नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय तस्करी—वाराणसी पुलिस की यह कार्रवाई कफ सिरप माफिया के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

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