वाराणसी | रॉयल शाइन टाइम्स
उपासना स्थलों पर कर लगाए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए नगर निगम, वाराणसी ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्मार्ट सिटी सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में साफ शब्दों में कहा कि नगर निगम द्वारा किसी भी उपासना स्थल पर कोई दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है और उन्हें गृहकर से पूर्ण रूप से मुक्त रखा गया है।
नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम वाराणसी द्वारा मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा सहित सभी उपासना स्थलों को गृहकर से छूट दी गई है। वहीं जलकर और सीवरकर में 50 प्रतिशत की रियायत लागू की गई है। यह व्यवस्था नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 175 और 177 के अंतर्गत की गई है, जिसमें उपासना स्थलों को गृहकर से मुक्त रखने का स्पष्ट प्रावधान है। हालांकि जलकर और सीवरकर को पूर्ण रूप से करमुक्त नहीं किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश शासन के 9 मई 2025 के आदेश के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 से नगर निगमों में पहली बार गृहकर, जलकर और सीवरकर का एकीकृत बिल जारी किया जा रहा है। इससे पहले गृहकर तथा जलकल विभाग द्वारा जलकर और सीवरकर के अलग-अलग बिल जारी किए जाते थे, जिन्हें अब संयुक्त रूप से संपत्ति कर के रूप में वसूला जा रहा है।
नगर आयुक्त ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के शेष चार महीनों में राजस्व लक्ष्य की पूर्ति के लिए 20 हजार रुपये से अधिक संपत्ति कर बकाया वाले भवनों को डिमांड नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन उपासना स्थलों के मामले में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम द्वारा उपासना स्थलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है, ताकि उन्हें विधिवत करमुक्त श्रेणी में दर्ज किया जा सके। कोतवाली जोन में अब तक 40 मंदिर, 6 मस्जिद और 1 गुरुद्वारा को चिन्हित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, जो उपासना स्थल आयकर अधिनियम की धारा 80G के अंतर्गत आते हैं, उन्हें जलकर और सीवरकर में 50 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट प्रदान की जाएगी।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने दोहराया कि नगर निगम का उद्देश्य किसी भी उपासना स्थल पर कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि शासनादेश और विधिक प्रावधानों के अनुरूप कर व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाना है।

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