नई दिल्ली/महाराष्ट्र।
देश के प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर ऐसा ऐलान कर दिया है जिसने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में हलचल मचा दी है। अन्ना ने घोषणा की है कि वे 30 जनवरी 2026 से अपने गाँव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन पर बैठेंगे—और यह अनशन उनकी अंतिम सांस तक चलेगा।
मुख्यमंत्री को पत्र, कड़े शब्दों में चेतावनी
अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों से जुड़ा कानून तुरंत लागू नहीं किया गया,
तो वे प्राण त्यागने तक पीछे नहीं हटेंगे।
पत्र में उन्होंने लिखा है कि सरकार ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए, इसलिए अब वे संघर्ष के अंतिम चरण में जाने को मजबूर हैं।
सियासी हलचल तेज
अन्ना हजारे के इस दो-टूक घोषणा के बाद
महाराष्ट्र से दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है।
सरकारी गलियारों से लेकर विपक्ष तक सभी पक्षों में चिंता और सक्रियता बढ़ गई है। प्रशासन स्तर पर भी स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
क्यों शुरू कर रहे हैं आमरण अनशन?
अन्ना हजारे लंबे समय से
किसानों की समस्याओं,
लोकपाल-लोकायुक्त व्यवस्था को मजबूत करने,
और भ्रष्टाचार-नियंत्रण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन
जैसी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं।
उनका कहना है कि सरकार ने ठोस कदम उठाने के बजाय सिर्फ आश्वासन दिए हैं।
रालेगण सिद्धि में तैयारियाँ
उनके गाँव रालेगण सिद्धि में स्थानीय लोग और समर्थक
अनशन की तैयारियों में जुट गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियाँ भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अन्ना हजारे के इस नए संघर्ष से एक बार फिर देश में जन आंदोलन की हलचल के संकेत स्पष्ट दिखने लगे हैं। आने वाले दिनों में राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए यह मामला बड़ी चुनौती बनने वाला है।

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