काशी–तमिल मंगल बंदिशों के रंग में रंगे 3000 दर्शक, नमो घाट पर थिरकता रहा संगमम
लोकगीत, बिरहा और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां; अतिथियों का विश्वनाथ धाम में भव्य स्वागत
वाराणसी। काशी तमिल संगमम 4.0 के चौथे दिन नमो घाट कला, संस्कृति और लोक परंपराओं का अनोखा संगम बन गया। घाट की सीढ़ियों पर बैठे करीब 3000 दर्शक कभी काशी–तमिल मंगल बंदिशों के सुरों में बंधे नज़र आए तो कभी विरह–वेदना और मांगलिक गीतों की धुन पर थिरक उठे। पूरे कार्यक्रम के दौरान काशी और दक्षिण भारत की लोक-सांस्कृतिक विरासत का मनमोहक मेल देखने को मिला।
बिरहा की गूंज, दर्शकों की उत्साहपूर्ण तालियां
कार्यक्रम की शुरुआत विष्णु यादव और उनकी टीम ने बिरहा गायन से की। “बनारस बम-बम बोले…”, “काशी भ्रमण…” और “मोदी जी के बनल सरकार बा…” जैसे गीतों ने माहौल में उत्साह भर दिया।
बिरहा परंपरागत रूप से विरह अथवा विदाई के अवसर पर गाया जाता है, लेकिन विष्णु यादव ने इसे उल्लास और उत्सव के गीत में बदलकर प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और देर तक थिरकते रहे।
तमिल–केरल की ‘कुंभी’ ने बांधा समां
तमिलनाडु व केरल में मांगलिक अवसरों पर गाए जाने वाले लोकप्रिय लोकगीत ‘कुंभी’ को रविचंद्रन और उनकी टीम ने शानदार ताल–लय के साथ प्रस्तुत किया। नर्तकियों व वादकों का बेहतरीन तालमेल देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। यह कार्यक्रम की अंतिम और सबसे सराही गई प्रस्तुति रही।
कथक, कोलट्टम और भजन की मनभावन पेशकश
दूसरी प्रस्तुति में शुभम त्रिपाठी और दल ने गणेश वंदना तथा जय भोले शंकर… जैसे भजनों से वातावरण भक्तिमय कर दिया।
इसके बाद रविचंद्रन की टीम ने प्रसिद्ध कोलट्टम लोक नृत्य प्रस्तुत किया।
काशी की रंजना उपाध्याय व उनकी टीम ने कथक की खूबसूरत प्रस्तुति से दर्शकों को मुग्ध कर दिया। कथक का समापन तराना से हुआ, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
यह पूरा कार्यक्रम उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज और दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, तंजावूर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।
शैक्षणिक भ्रमण: 800 विद्यार्थियों ने देखा नमो घाट, तमिल साहित्य ने खींचा ध्यान
संगमम के तहत शनिवार को 800 विद्यार्थी नमो घाट पहुंचे जहां तमिल साहित्य पर आधारित कार्यक्रम आयोजित था। छात्रों ने विभिन्न स्टालों पर तमिल साहित्य, महापुरुषों और सांस्कृतिक धरोहर संबंधी प्रदर्शनियों को देखा।
ओडीओपी स्टॉलों पर प्रदर्शित काशी की कारीगरी ने भी उन्हें आकर्षित किया।
आज के 5 तमिल–हिंदी शब्द
- कण्णु – आंख
- इमै – पलक
- पुरुवम् – भौंह
- कादु – कान
- मूक्कु – नाक
काशी विश्वनाथ धाम में संगमम के तीसरे समूह का भव्य स्वागत
संगमम का तीसरा समूह शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचा। मंदिर प्रशासन ने अतिथियों का डमरू दल, पुष्पवर्षा और पारंपरिक विधियों से स्वागत किया।
अतिथियों को भव्य कॉरिडोर का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने धाम के स्थापत्य, ऐतिहासिक स्वरूप, नई सुविधाओं और बढ़ती श्रद्धा–धारा के बारे में जानकारी ली।
गंगा द्वार से मां गंगा का दर्शन कराने के बाद सभी के लिए अन्नक्षेत्र में दोपहर भोजन की व्यवस्था की गई।

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