जाँच में खुलेंगे नशे के नये पैंतरे: प्रतिबंधित कफ सीरप तस्करी पर SIT की बड़ी कार्रवाई शुरू

वाराणसी।
प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सीरप की करोड़ों की तस्करी के बहुचर्चित प्रकरण में वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस अब पूरी गंभीरता से पड़ताल में जुट गई है। नेताओं और पुलिस की संभावित भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस कमिश्नर ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है, जो पूरे नेटवर्क, संपत्तियों और फर्जी बिलिंग की गहराई से जांच करेगी।

एडीसीपी काशी जोन सरवणन टी. SIT के अध्यक्ष बनाए गए हैं, जबकि एसीपी कोतवाली अतुल अंजन त्रिपाठी सदस्य और SHO कोतवाली दयाशंकर सिंह विवेचक नियुक्त किए गए हैं। पूरी जांच की साप्ताहिक समीक्षा DCP काशी करेंगे।


10 साल की कुंडली खंगालेगी SIT

SIT माफिया शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल और पूरे गिरोह के पिछले 10 वर्षों के अवैध कारोबार की जांच करेगी।
पड़ताल में शामिल होंगे—

  • खरीदी गई संपत्तियाँ: मकान, कॉम्पलेक्स, होटल, मार्केट
  • उसके संपर्क: रिश्तेदार, दोस्त, कारोबारी सहयोगी
  • 100 से अधिक दवा व्यवसायी और उनकी फर्में

SIT की रडार पर ऐबोट हेल्थकेयर के सुपर स्टॉकिस्ट शैली ट्रेडर्स भी है, जिसे रांची से फर्जी पते पर काशी में पंजीकृत कर कारोबार चलाया जा रहा था।


89 लाख शीशियों का खेल—100 करोड़ की अवैध खरीद–फरोख्त

औषधि विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि शुभम नेटवर्क ने—

  • 89 लाख शीशी प्रतिबंधित कफ सीरप की खरीद–बिक्री की
  • बाजार कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये
  • 93 मेडिकल स्टोरों के नाम पर 84 लाख शीशियों की बिलिंग दिखाई गई
  • इनमें अधिकांश दुकानें मौजूद ही नहीं थीं

नौ बंद फर्मों का इस्तेमाल फर्जी बिलिंग और नशा सप्लाई के लिए किया गया। इनमें शामिल हैं—
सृष्टि फार्मा, जीटी इंटरप्राइजेज, शिवम फार्मा, हर्ष फार्मा, डीएसए फार्मा, महाकाल मेडिकल स्टोर, निशांत फार्मा, वीपीएम मेडिकल एजेंसी और श्री बालाजी मेडिकल।


गोदाम में पहुंचने से पहले ही बदल जाता था माल का रास्ता

जांच में सामने आया कि सप्तसागर दवा मंडी के लगभग 150 स्टॉकिस्टों पर दबाव डालकर बिलिंग कराई जाती थी।
गोदाम में पहुंचने के बजाय माल सीधे शुभम जायसवाल के गोदाम भेज दिया जाता था।


फर्जी नियुक्ति और दो जगह कार्यरत पाए जाने का भी खुलासा

औषधि आयुक्त रोशन जैकब के निर्देशन में हुई जांच में पता चला—

  • शुभम एक ही समय में रांची स्थित शैली ट्रेडर्स
    और
  • वाराणसी स्थित न्यू वृद्धि फार्मा
    में कार्यरत मिला, जो लाइसेंसिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

अब तक शुभम और उसके पिता भोला जायसवाल सहित 28 दवा कारोबारियों पर कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका है।
शुभम विदेश भाग चुका है, उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस की तैयारी है।


इन कारोबारियों के नाम SIT की निगरानी में

जांच में जिन दवा कारोबारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं—
तुषार अग्रवाल, नीरज सेठ, महेश कुमार लालवानी, मनोज यादव, रिषभ यादव, राजीव यादव, प्रतीक कुमार, धर्मेंद्र अग्रवाल, विवेक खन्ना, अल्पेश पटेल, मुकेश यादव, योगेंद्र श्रीवास्तव, बीरेंद्र वर्मा, दिलीप कुमार, महेश खेतान, दीवेश जायसवाल, विकास सिंह, विनोद केसरवानी, अंकुश सिंह, प्रतीक मिश्रा, विशाल जायसवाल, नीरज सिंह, अशोक सिंह, राहुल यादव, आदर्श पांडेय और आनंद जायसवाल।

औषधि विभाग अब तक 76 फर्मों की जांच कर चुका है, जबकि जिन 26 फर्मों पर FIR दर्ज हुई है, उनके लाइसेंस निरस्त किए जा रहे हैं।


एसआईटी की जांच अब संपत्ति, फर्जी लाइसेंसिंग, अवैध बिलिंग और बंगाल–बांग्लादेश तक फैले संभावित नेटवर्क की वास्तविक कड़ियों तक पहुंचने की दिशा में तेजी पकड़ चुकी है। वाराणसी में नशे के इस बड़े नेटवर्क के खुलासे में आने वाले दिनों में और चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आ सकती हैं।

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