वाराणसी।
भारत की सांस्कृतिक आत्मा कही जाने वाली काशी में इस बार कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। स्थानीय कलाकारों को मंच देने और परंपरागत कला–संस्कृति को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से आयोजित काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव 2025 इस वर्ष और भी भव्य स्वरूप में सामने आया है। पिछले दो वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह महोत्सव अब वाराणसी की सांस्कृतिक धड़कनों का हिस्सा बन चुका है।
तीन आयु वर्ग—चार विधाएँ
महोत्सव को तीन आयु वर्ग (10–18, 18–40 और 40+ वर्ष) तथा चार प्रमुख विधाओं—गायन, वादन, नृत्य और नुक्कड़ नाटक—में विभाजित किया गया है।
तीनों विकास खंडों में एकसाथ हुआ शुभारंभ
17 नवंबर 2025 को महोत्सव का उद्घाटन आराजीलाइन, काशी विद्यापीठ और सेवापुरी विकास खंडों की सभी न्याय पंचायतों में एकसाथ किया गया।
नगरीय क्षेत्रों—आदमपुर, कोतवाली, वरुणापार, दशाश्वमेध और भेलूपुर—में भी कार्यक्रम निर्धारित हैं।
पूरी प्रतियोगिता तीन चरणों में हो रही है:
1️⃣ न्याय पंचायत स्तर
2️⃣ विकास खंड/जोन स्तर
3️⃣ जनपद स्तर
रिकॉर्ड–तोड़ भागीदारी: 13,667 प्रतिभागी और 45,703 दर्शक
महोत्सव के पहले ही दिन अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला।
आयु वर्गवार प्रतिभागी:
- 10–18 वर्ष: 8,774
- 18–40 वर्ष: 3,636
- 40+ वर्ष: 1,257
कुल प्रतिभागी: 13,667
दर्शक: 45,703
विधावार प्रतिभागी:
- गायन: 3,052
- वादन: 1,280
- नृत्य: 8,200
- नुक्कड़ नाटक: 1,135
न्याय पंचायत स्तर—विकास खंडवार प्रदर्शन
आराजीलाइन विकास खंड
- कुल प्रतिभागी: 7,223
- दर्शक: 24,765
प्रमुख अतिथि: - बसंतपुर — राजेश सिंह (सह जिला संयोजक, भाजपा)
- खेवली — वीरेंद्र कुमार (पंचायत सपोर्ट उपाध्यक्ष, भाजपा)
सेवापुरी विकास खंड
- कुल प्रतिभागी: 4,332
- दर्शक: 12,500
प्रमुख अतिथि: - बरकी — प्रभात श्रीवास्तव (मंडल अध्यक्ष, भाजपा)
- कपसेठी, वाराडीह — स्वाती सिंह (जिला पंचायत सदस्य)
काशी विद्यापीठ विकास खंड
- कुल प्रतिभागी: 2,062
- दर्शक: 8,438
प्रमुख अतिथि: - स्वामी हरसेवानंद पब्लिक स्कूल — पूनम मौर्या (जिला पंचायत अध्यक्ष)
- नवनिता कुवर पब्लिक स्कूल, सुसुवाही — सुरेश कुमार पटेल (पार्षद) एवं श्याम भूषण शर्मा (करौदी पार्षद)
काशी में कला की नई ज्योति—13,667 प्रतिभागियों ने जलाया प्रतिभा का दीप
महोत्सव की अद्भुत ऊर्जा ने पूरे जिले को रचनात्मकता से भर दिया है।
कला, संस्कृति और परंपरा के इस संगम ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि काशी न केवल आध्यात्मिक राजधानी है, बल्कि देश की सांस्कृतिक धड़कन भी है।

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