वाराणसी / पिंडरा।
पिंडरा तहसील क्षेत्र की सहकारी समिति लिमिटेड करखियाँव पर किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि समिति में खाद वितरण का पूरा खेल कागज पर चलता है, जबकि असल में उन्हें खाद उपलब्ध ही नहीं कराया जाता। रजिस्टर में बोरी-बोरी खाद बांटे जाने की प्रविष्टियाँ दर्ज हैं, लेकिन खेत तक कोई खाद नहीं पहुँचती।
क्षेत्र के कई किसानों ने बताया कि—
समिति में खाद की वास्तविक उपलब्धता कभी स्पष्ट नहीं रहती।
वितरण के समय “पहले से तय लोगों” को प्राथमिकता, बाक़ी किसान लाइन में लगकर भी खाली हाथ लौटते हैं।
कई किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री की आशंका है – रजिस्टर में बोरी चढ़ी, लेकिन किसान कहता है “हमें तो एक किलो भी नहीं मिला।”
खाद का सीमित स्टॉक आकर भी “अचानक खत्म” होने की कहानी दोहराई जाती है।
कुछ किसानों का आरोप है कि समिति के कर्मचारी “चहेते लोगों” को खिड़की के अंदर से पहले खाद दे देते हैं, जबकि आम किसानों को बताया जाता है कि “स्टॉक खत्म हो गया है।”
रबी सीजन शुरू होने के कारण खाद की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। समय पर खाद न मिलने से गेहूँ, चना, मटर व सरसों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका है।
जब समिति के संबंधित कर्मचारियों से इस विषय पर बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने किसी भी तरह की अनियमितता से इंकार किया और कहा कि—
“समिति में खाद उपलब्ध होते ही नियमानुसार वितरण किया जाता है और सभी एंट्री सही हैं।”
हालाँकि किसानों का कहना है कि यदि सब कुछ सही है तो
स्टॉक बुक
बिक्री रजिस्टर
दैनिक खाद आगमन–वितरण रजिस्टर
—इन तीनों की जांच कराई जाए।
क्योंकि इन्हीं कागजों में सबसे अधिक गड़बड़ी का शक है।
स्थानीय किसानों ने जिला सहकारिता अधिकारी (DCO) और उपजिलाधिकारी पिंडरा से तत्काल जांच की मांग की है, ताकि यह मालूम हो सके कि—
खाद आया कितना और बाँटा कितना?
किन किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री की गई?
क्या समिति में स्टॉक हेराफेरी होती है?

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