वाराणसी में बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक: जिलाधिकारी ने गुणवत्ता शिक्षा और निपुण लक्ष्य पर दिया जोर

राइफल क्लब में आज जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता, निपुण भारत मिशन की प्रगति, डीबीटी (Direct Benefit Transfer) और विद्यालयों की निरीक्षण व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने एआरपी द्वारा विकास क्षेत्र आराजी लाइन, पिंडरा और नगर क्षेत्र में कम सपोर्टिंग सुपरविजन पाए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि माह नवंबर में 100% सपोर्टिंग सुपरविजन लक्ष्य पूरा किया जाए।

डाइट मेंटरों के कम सुपरविजन पाए जाने पर डाइट प्राचार्य को निर्देशित किया गया कि सभी मेंटर निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य पूर्ण करें। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि रोस्टर के अनुसार किसी दिन अवकाश है तो अगले दिन निरीक्षण अवश्य किया जाए।

निपुण प्लस एप के माध्यम से छात्रों के असेसमेंट की समीक्षा में पाया गया कि निपुण घोषित बच्चों की प्रगति संतोषजनक नहीं है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी विद्यालय पठन-पाठन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें और पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ के माध्यम से दूर करें।

उन्होंने कहा कि हर विकास क्षेत्र में कम से कम 80% बच्चे सक्षम श्रेणी में आने चाहिए। डीबीटी प्रगति की समीक्षा में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन बच्चों का आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना है, उन्हें एसडीएम स्तर पर समन्वय कर शीघ्र तैयार कराया जाए और नवंबर तक डीबीटी कार्य पूर्ण किया जाए।

DTF और BTF अधिकारी विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान शिक्षकों के अवकाश की जांच करें कि क्या वह सक्षम स्तर से स्वीकृत है या नहीं।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए — इसके लिए बाउंड्री वॉल ऊंची कराई जाए और जहां सुरक्षा गैप हैं, उनकी सूची तैयार की जाए।

उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिव्यांग बच्चों के प्रमाण पत्र कैंप में अधिकतम बच्चों के प्रमाण पत्र बनवाने के निर्देश दिए।

अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षक अत्यधिक अवकाश न लें, इसकी निगरानी पोर्टल से की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि जनपद वाराणसी के सभी विकास क्षेत्र ‘निपुण विकास क्षेत्र’ घोषित हों, जिसके लिए विद्यालयों में 80% से अधिक बच्चे निपुण श्रेणी में हों।

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