वाराणसी के स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (UPSEB) न्यायाधीश विनोद प्रसाद ने बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष इंद्रदेव मिश्रा के बेटे नीरज मिश्रा की हत्या के मामले में चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) रोहित मौर्य ने पैरवी की।
🔹 मामला क्या था
17 अक्टूबर 2015 को नीरज मिश्रा अपने मित्र भूपेंद्र तिवारी के साथ आशापुर स्थित महाराजा गार्डन में एक कार्यक्रम में गए थे। वहीं शराब में नुआन प्वाइजन मिलाकर उन्हें पिला दिया गया। घर पहुंचने के बाद उनकी हालत बिगड़ी और बीएचयू अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जांच में सामने आया कि पूनम मिश्रा और नीरज मिश्रा के बीच भूमि लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। पूनम मिश्रा ने 29 लाख रुपये लेकर भी जमीन नहीं दी थी और चेक बाउंस हो गया था। इसको लेकर न्यायालय में 138 एनआई एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज था। पैसे लौटाने और मुकदमे से बचने के लिए पूनम मिश्रा ने अन्य अभियुक्तों भूपेंद्र नाथ तिवारी, प्रमोद त्रिपाठी और नरेंद्र त्रिपाठी उर्फ शिब्लू के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।
🔹 न्यायालय का निर्णय
अभियोजन की ओर से 13 गवाहों के साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिनसे अभियुक्तों की संलिप्तता प्रमाणित हुई। न्यायालय ने चारों अभियुक्तों — पूनम मिश्रा, भूपेंद्र नाथ तिवारी, प्रमोद त्रिपाठी और नरेंद्र त्रिपाठी उर्फ शिब्लू — को आजीवन कारावास और प्रत्येक को ₹1,00,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
नीरज मिश्रा के पिता इंद्रदेव मिश्रा, बनारस बार एसोसिएशन वाराणसी के पूर्व अध्यक्ष, हैं। उनके भाई संजय मिश्रा और जीजा वेद प्रकाश पांडे भी अधिवक्ता हैं।

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