वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में विभागाध्यक्ष (HOD) पर हमला करने की सनसनीखेज साजिश का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मुठभेड़ के बाद तेलंगाना के शूटर बी. भास्कर और प्रयागराज निवासी प्रमोद कुमार उर्फ गणेश पासी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में भास्कर ने कबूल किया कि उसे BHU के ही दो प्रोफेसरों — प्रो. बूदाटी वेंकटेश लू और प्रो. कासिम बाबू — ने प्रो. सी.एस. रामचंद्र मूर्ति पर हमला करने के लिए बुलाया था।
साजिश की शुरुआत
तेलुगु विभाग के HOD पद को लेकर प्रोफेसरों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप है कि वेंकटेश लू और कासिम बाबू, प्रो. मूर्ति से नाराज थे क्योंकि उन्होंने शिकायत कर उन्हें पद से हटवा दिया था। बदला लेने के लिए दोनों ने अपने पुराने संपर्क भास्कर को तेलंगाना से वाराणसी बुलाया और 2 लाख रुपये में सुपारी तय की।
हमला कैसे हुआ
25 जुलाई को भास्कर और उसका साथी फ्लाइट से वाराणसी पहुंचे और एक होटल में रुके। 26 व 27 जुलाई को BHU परिसर में रेकी की गई। 28 जुलाई की शाम, बिरला हॉस्टल चौराहे के पास प्रो. मूर्ति पर लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ वार किए गए। हमले में प्रोफेसर के दोनों हाथ टूट गए, लेकिन उनकी जान बच गई।
बचा समझकर भाग गए शूटर
भास्कर ने पुलिस को बताया, “हमने सोचा कि प्रोफेसर मर गए हैं, इसलिए भाग गए।” हमलावर बाइक से BHU कैंपस से हाईवे की ओर निकल गए।
गिरफ्तारी और कबूलनामा
पुलिस ने सर्विलांस और मुखबिर की मदद से भास्कर को तेलंगाना के उत्तकूर नारायणपेट से और उसके साथी प्रमोद को प्रयागराज से मुठभेड़ के दौरान पकड़ा। पूछताछ में भास्कर ने पूरा घटनाक्रम बताया।
BHU में विरोध प्रदर्शन
हमले के अगले दिन, 29 जुलाई को BHU के प्रोफेसरों और छात्रों ने सिंह द्वार पर धरना दिया और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाया और कार्रवाई का भरोसा दिया।
यह मामला न केवल विश्वविद्यालय की साख पर सवाल उठाता है, बल्कि शिक्षा जगत में आपसी प्रतिद्वंद्विता के खतरनाक स्तर को भी उजागर करता है।

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