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बजट का इतिहास, रिकॉर्ड और परंपराएं: 1860 से 2026 तक का सफरजानिए कौन बना रिकॉर्ड होल्डर

Vivek Kumar

Sat, Jan 31, 2026

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बजट का इतिहास, रिकॉर्ड और परंपराएं: 1860 से 2026 तक का सफरजानिए कौन बना रिकॉर्ड होल्डर

देश की निगाहें एक बार फिर आम बजट पर टिकी हैं। 1 फरवरी को केंद्र सरकार यूनियन बजट 2026 पेश करने जा रही है। इस बार बजट इसलिए भी खास है क्योंकि वित्त मंत्री इसे लगातार नौवीं बार संसद में पेश करेंगी। एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में इतने बजट पेश करने वाली वह भारत की पहली वित्त मंत्री बन चुकी हैं।

लेकिन बजट सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं का दस्तावेज नहीं है—इसके पीछे एक लंबा इतिहास, कई रिकॉर्ड और दिलचस्प परंपराएं जुड़ी हुई हैं।


आज़ाद भारत का पहला बजट

भारत में बजट की परंपरा आज़ादी से पहले ही शुरू हो चुकी थी।

  • ब्रिटिश शासन में 7 अप्रैल 1860 को ने भारत का पहला बजट पेश किया।
  • आज़ाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को संसद में रखा गया।
  • यह बजट देश के पहले वित्त मंत्री ने प्रस्तुत किया था।
    (यह अंतरिम बजट था; पहला पूर्ण बजट 1948 में आया।)

सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड

यूनियन बजट के इतिहास में सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड के नाम दर्ज है।

  • कुल 10 बजट (अंतरिम बजट सहित)
  • 1959–1964: 6 बजट
  • 1967–1969: 4 बजट

प्रणब मुखर्जी का अहम योगदान

पूर्व राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री के रूप में—

  • कुल 8 बजट पेश किए
  • 1982–1984: 3 बजट
  • 2009–2012 (UPA सरकार): लगातार 5 बजट

उल्लेखनीय है कि ने कुल 9 बजट पेश किए, जिससे वह इस सूची में दूसरे स्थान पर आते हैं।


निर्मला सीतारमण का नया अध्याय

  • 2019 से पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री
  • अब तक 1 अंतरिम बजट सहित 8 बजट पेश कर चुकी हैं
  • यूनियन बजट 2026 उनका लगातार नौवां बजट होगा—निरंतरता के लिहाज से एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड

बजट से पहले क्यों होती है ‘हलवा सेरेमनी’?

हर बजट से पहले वित्त मंत्रालय में एक खास परंपरा निभाई जाती है—

  • इसे ‘हलवा सेरेमनी’ कहा जाता है
  • बजट दस्तावेजों की छपाई शुरू होने से पहले हलवा बनाया जाता है
  • अधिकारियों में वितरित किया जाता है
  • इसके बाद सभी अधिकारी ‘लॉक-इन पीरियड’ में चले जाते हैं
  • इस दौरान बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह बंद रहता है, ताकि बजट की जानकारी लीक न हो

बजट: सिर्फ आंकड़े नहीं, लोकतांत्रिक परंपरा

यूनियन बजट न केवल देश की आर्थिक दिशा तय करता है, बल्कि यह भारत की संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी एक मजबूत स्तंभ है—जहां इतिहास, रिकॉर्ड और परंपराएं मिलकर हर साल एक नई आर्थिक कहानी लिखती हैं।

— रॉयल शाइन टाइम्स

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