गुजरात की राजनीति में इस समय एक नया नाम तेजी से चर्चा में है—अंकिता परमार। सोशल मीडिया से निकलकर सीधे चुनावी मैदान में उतरीं अंकिता को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने वडोदरा की पोर जिला पंचायत सीट से उम्मीदवार बनाया है। उनकी उम्मीदवारी ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि पार्टी के अंदर भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। �
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कौन हैं अंकिता परमार?
अंकिता परमार एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर 10 लाख (1 मिलियन) से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वे अपने फिटनेस वीडियो, लाइफस्टाइल कंटेंट और महिलाओं की स्वतंत्रता से जुड़े संदेशों के लिए जानी जाती हैं। �
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मूल रूप से वडोदरा की रहने वाली
रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई
खुद का जिम चलाती हैं और फिटनेस को बढ़ावा देती हैं �
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राजनीति में पहले से सक्रिय
अंकिता की राजनीति में एंट्री नई जरूर है, लेकिन वे पूरी तरह नई नहीं हैं।
2021 में तालुका पंचायत सदस्य चुनी गईं
करीब ढाई साल तक चेयरमैन रहीं
2026 में BJP युवा मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष बनीं �
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यानी सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी राजनीति का भी अनुभव उनके पास है।
क्यों बढ़ा सियासी तापमान?
अंकिता को टिकट मिलने के बाद पार्टी के अंदर ही असंतोष सामने आया है।
इस सीट की दावेदार नयना परमार को टिकट नहीं मिला
नयना ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया
पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी साफ दिख रही है �
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राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इससे वोट बंट सकते हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
सोशल मीडिया बनाम जमीनी राजनीति
BJP ने अंकिता परमार जैसे लोकप्रिय डिजिटल चेहरे पर दांव खेलकर यह संकेत दिया है कि अब चुनावी रणनीति में सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
युवाओं के बीच मजबूत पकड़
डिजिटल पहुंच का फायदा
लेकिन जमीनी नेटवर्क की चुनौती
यही वजह है कि यह चुनाव अब सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि “सोशल मीडिया बनाम परंपरागत राजनीति” का मुकाबला भी बन गया है।
आगे क्या?
26 अप्रैल को मतदान और 28 अप्रैल को परिणाम घोषित होंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इंस्टाग्राम की लोकप्रियता वोटों में बदल पाएगी या फिर जमीनी