उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। अयोध्या और काशी के बाद अब संघ की नजर मथुरा पर टिक गई है, जिसे आगामी चुनावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का मंगलवार को मथुरा दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। खास बात यह है कि पिछले 15 दिनों के भीतर यह उनका दूसरा मथुरा दौरा है, जबकि जनवरी 2026 से अब तक वह तीन बार यहां आ चुके हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि ब्रज क्षेत्र संघ की प्राथमिकता में तेजी से उभर रहा है।
मलूक पीठ में आयोजित मलूक दास जयंती कार्यक्रम में मोहन भागवत की मौजूदगी केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे ब्रज क्षेत्र के संत समाज और धार्मिक नेतृत्व के साथ संघ के गहरे होते संबंधों के रूप में देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने इसे और राजनीतिक महत्व दे दिया।
सूत्रों के अनुसार, संघ मथुरा को अयोध्या और काशी के साथ जोड़कर “हिंदू सभ्यतागत त्रिकोण” के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके जरिए ब्रज क्षेत्र में वैचारिक एकीकरण और संगठनात्मक विस्तार को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनावों में बड़ा प्रभाव डाल सकती है, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र की सीटों पर।
अब बड़ा सवाल यह है—क्या मथुरा फोकस से यूपी की राजनीति में नया समीकरण बनेगा?
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— रॉयल शाइन टाइम्स