वाराणसी। देश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में इतिहास, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत भव्य महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का मंचन 3 से 5 अप्रैल तक BLW मैदान में किया जाएगा। आयोजन को लेकर शहरवासियों में जबरदस्त उत्साह है और इसे लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
यह महानाट्य केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास की गौरवशाली परंपरा को जीवंत करने का एक सशक्त प्रयास है। मंच पर सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, न्याय, सुशासन और सांस्कृतिक वैभव की अमर गाथा भव्य रूप में प्रस्तुत की जाएगी।
कौन थे सम्राट विक्रमादित्य?
उज्जैन के प्रतापी शासक सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास और लोककथाओं के महानायक माने जाते हैं। उन्होंने शकों पर विजय प्राप्त कर ‘शकारि’ की उपाधि धारण की और विक्रम संवत् की स्थापना की। बेताल-पच्चीसी और सिंहासन-बत्तीसी जैसे ग्रंथों में उनका चरित्र एक न्यायप्रिय, वीर और प्रजा-हितैषी शासक के रूप में वर्णित है।
महानाट्य में क्या होगा खास?
100 से अधिक कलाकारों की भव्य प्रस्तुति
रथ, अश्व, ऊँट और पालकी का वास्तविक मंचन
आधुनिक ग्राफिक्स, संगीत और नृत्य का अद्भुत संगम
प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग का सजीव अनुभव
सांस्कृतिक एकता का संदेश
काशी की पावन धरती पर मध्य प्रदेश के कलाकारों द्वारा यह मंचन उत्तर और मध्य भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करता है। यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण और ऐतिहासिक चेतना को भी नई दिशा देता है।
विशेष आकर्षण
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर को अर्पित किया जाएगा। यह भारतीय समय-गणना परंपरा और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम होगा।
शहर में दिखा जबरदस्त उत्साह
BLW मैदान में चल रही रिहर्सल के दौरान ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इससे साफ है कि यह आयोजन वाराणसी के लिए एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक उत्सव साबित होगा।
- रॉयल शाइन टाइम्स के लिए यह आयोजन न केवल खबर, बल्कि काशी की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है—जहां इतिहास मंच पर जीवंत होगा और परंपरा नए रूप में जन-जन तक पहुंचेगी।

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