‘धुरंधर 2’ पर सियासी घमासान: ‘आतिफ अहमद’ किरदार को लेकर बढ़ा विवाद, नेताओं के तीखे बयान
प्रयागराज/लखनऊ। फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म के एक किरदार ‘आतिफ अहमद’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसकी तुलना उत्तर प्रदेश के चर्चित माफिया-राजनेता अतीक अहमद से की जा रही है।
इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है।
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने फिल्म पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ऐसी फिल्मों के जरिए एक खास राजनीतिक एजेंडा फैलाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि सिनेमा के माध्यम से लोगों के मन में एक विशेष विचारधारा स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, AIMIM के प्रवक्ता वारिस पठान ने भी फिल्म के कंटेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ फिल्में केवल मुनाफा कमाने के लिए बनाई जाती हैं और उनमें एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जाता है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
दूसरी ओर, बीजेपी नेता राम कृपाल यादव ने फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि सिनेमा समाज की वास्तविकताओं को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम है। उनके अनुसार, यदि कोई कहानी वास्तविक घटनाओं या व्यक्तियों से प्रेरित है, तो उसे दिखाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एस.टी. हसन ने भी फिल्म के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को लेकर अब तक जांच एजेंसियों की ओर से कोई ठोस पुष्टि नहीं की गई है, ऐसे में फिल्मों में इस तरह का चित्रण भ्रम पैदा कर सकता है।
वहीं, जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि यह सेंसर बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह तय करे कि क्या दिखाया जाना उचित है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अपराधी का महिमामंडन समाज के लिए गलत संदेश दे सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इसे दर्शकों की पसंद से जोड़ते हुए कहा कि फिल्म निर्माता वही बनाते हैं, जो जनता देखना चाहती है। सिनेमा बाजार की मांग के अनुसार चलता है।
इस बीच, शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने लोगों से अपील की कि फिल्मों को मनोरंजन के नजरिए से देखा जाए और ऐसा कोई कंटेंट न हो जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
अभिव्यक्ति बनाम जिम्मेदारी की बहस फिर तेज
फिलहाल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। यह मामला एक बार फिर इस बहस को हवा दे रहा है कि सिनेमा की सीमाएं क्या होनी चाहिए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।
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