लखनऊ से बड़ी सियासी खबर: नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल, अखिलेश यादव ने दिलाई सदस्यता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। पश्चिमी यूपी के कद्दावर मुस्लिम नेता ने की सदस्यता ग्रहण कर ली। सपा प्रमुख ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में उन्हें औपचारिक रूप से सदस्यता दिलाई।

नसीमुद्दीन के साथ बड़ी संख्या में समर्थकों ने भी सपा जॉइन की। पार्टी सूत्रों के अनुसार 15,758 लोगों ने एक साथ सदस्यता ली, जिनमें बड़ी संख्या पूर्व बसपा कार्यकर्ताओं की बताई जा रही है।


अखिलेश का हमला: “कोडीन भइया कहां हैं?”

सदस्यता कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा—

“लखनऊ वाले कह रहे हैं कि दिल्ली की हवा खराब है, लेकिन सच्चाई यह है कि दोनों की हवा खराब है।”

उन्होंने कथित कोडीन कफ सिरप प्रकरण का जिक्र करते हुए सवाल उठाया—

“कोडीन भइया कहां हैं?”

अखिलेश ने कहा कि नसीमुद्दीन जैसे अनुभवी नेता का साथ मिलना सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती देगा। उन्होंने इसे पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) एकता की दिशा में अहम कदम बताया।


नसीमुद्दीन का संदेश: “मैं सबसे जूनियर कार्यकर्ता हूं”

सपा में शामिल होने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा—

“मैं पार्टी में सबसे जूनियर हूं। मैंने हमेशा अखिलेश यादव को नेता माना है। उन्होंने कभी हिंदू-मुस्लिम की बात नहीं की, सबकी बात की।”

उन्होंने शायरी के माध्यम से संदेश दिया—
“हयात लेके चलो, कायनात लेके चलो,
चलो तो सारे जमाने को साथ लेके चलो…”

उन्होंने 2027 में सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य बताते हुए सपा को मजबूत करने का आह्वान किया।


सपा का सियासी दांव क्यों अहम?

1️⃣ मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश

पश्चिम यूपी में प्रभाव रखने वाले नसीमुद्दीन के जरिए सपा अल्पसंख्यक मतदाताओं को स्पष्ट संदेश देना चाहती है।

2️⃣ AIMIM की सक्रियता के बीच रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम की बढ़ती सक्रियता को संतुलित करने की रणनीति भी हो सकता है।

3️⃣ बुंदेलखंड से पश्चिमी यूपी तक असर

बसपा और कांग्रेस में अहम भूमिका निभा चुके नसीमुद्दीन का प्रभाव कई क्षेत्रों में माना जाता है, जिसका लाभ सपा को चुनावी समीकरण में मिल सकता है।


सियासी सफर: “मिनी सीएम” से नई पारी तक

रेलवे ठेकेदारी से राजनीति में आए नसीमुद्दीन सिद्दीकी लंबे समय तक बसपा में सक्रिय रहे। 2007–12 की सरकार में उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभाग संभाले, जिसके चलते उन्हें “मिनी सीएम” तक कहा गया। 2017 में बसपा से अलग होने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और अब सपा में नई पारी शुरू की है।


क्या बदलेंगे 2027 के समीकरण?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है। पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

(रिपोर्ट: रॉयल शाइन टाइम्स, लखनऊ)

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