पिंडरा, वाराणसी (15 फ़रवरी 2026)।
मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए बदलावों तथा नए कानून VB-G RAM G के विरोध में निकाली जा रही गांधीवादी युवाओं की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ रविवार को पिंडरा क्षेत्र पहुँची। यात्रा पुआरीकलाँ से प्रारंभ होकर अहरक, पश्चिमपुर, दल्लीपुर, मगरी बाज़ार, गुलज़ारगंज, जगदीशपुर, परशोनी और बसनी होते हुए बेलवाँ (पिंडरा) में संपन्न हुई।
यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभिन्न गांवों में ग्रामीण मजदूरों से संवाद कर (मनरेगा) के संवैधानिक अधिकार की बहाली और नए कानून के संभावित प्रभावों पर चर्चा की।
जगदीशपुर में महिला मजदूरों से संवाद
जगदीशपुर में मुसहर समाज की महिला मजदूरों के साथ आयोजित बैठक में प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता (जीन ड्रेज़) ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को गांव में ही आय की गारंटी देकर सशक्त बनाया है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मजदूर विरोधी प्रावधान लागू किए जाते हैं तो गरीब, दलित, पिछड़े वर्ग, भूमिहीन मजदूर एवं महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होंगी और पलायन में वृद्धि हो सकती है।
बेलवाँ में समापन, नट समुदाय ने रखी चिंता
बेलवाँ में नट समुदाय संघर्ष समिति के कार्यालय पर यात्रा का समापन हुआ। समिति के अध्यक्ष प्रेम नट ने विमुक्त एवं घुमंतू समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनरेगा उनके लिए रोजगार का प्रमुख साधन रहा है। उनका आरोप था कि नए कानूनी प्रावधानों से योजना की प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है।
बैठक को संबोधित करते हुए गोकुल दलित ने कहा कि मनरेगा के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार मिला, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है। वहीं वरिष्ठ गांधीवादी रामधीरज (सर्व सेवा संघ) ने बताया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े युवा इस यात्रा के माध्यम से पूर्वांचल के मजदूरों की चिंताओं को संकलित कर सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
प्रमुख मांगें
- काम के संवैधानिक अधिकार को बहाल किया जाए।
- मजदूर विरोधी कानून VB-G RAM G को तत्काल वापस लिया जाए।
- मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की जाए।
यात्रा में मृत्युंजय मौर्या, सतीश साहनी, राहुल राजभर, गोकुल दलित, ओमप्रकाश मिश्रा, डॉ. देवेंद्र कुमार, अमन यादव, करण चौरसिया (झारखंड), विवेक यादव (मध्य प्रदेश), गौरव पुरोहित (पश्चिम बंगाल), राशिद शेख (बेगूसराय), राजू कुमार (सहरसा), डॉ. शैलेंद्र कुमार (नवादा), निर्भय अहिरवार (मध्य प्रदेश) सहित विभिन्न राज्यों के सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल रहे।
कार्यक्रम में नट समुदाय संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रेम नट, सौरभ, राहुल, करन, ज्योति, मीना, नेहा, रिया, नंदनी, चंदन सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एवं महिला मजदूर उपस्थित रहीं।
— रॉयल शाइन टाइम्स, वाराणसी संस्करण

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