राजधानी दिल्ली में ने को भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की गुलाबी मीनाकारी से निर्मित अनुपम अनुकृति भेंट की। यह भेंट मात्र शिष्टाचार नहीं, बल्कि काशी की पारंपरिक हस्तकला, सनातन संस्कृति और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने वाला सशक्त सांस्कृतिक संदेश बनी।
🔹 108 दिनों में तैयार हुई राम मंदिर की अनुकृति
यह कलाकृति स्थित श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर काशी के प्रसिद्ध शिल्पकार द्वारा तैयार की गई। गुलाबी मीनाकारी की इस अद्भुत अनुकृति के निर्माण में लगभग 2 किलोग्राम सोना-चांदी का उपयोग हुआ है, साथ ही इसमें हीरे भी जड़े गए हैं।
अनुकृति कुल 108 भागों में निर्मित है और इसे 108 दिनों में पूर्ण किया गया। निर्माण अवधि के दौरान 108 दिनों तक रामधुन का सतत जाप किया गया। स्वर्ण से निर्मित भगवान राम, कमल व धनुष-बाण की प्रतीकात्मक आकृति, चार शिखरों पर जड़े हीरे तथा भीतर प्रकाश व्यवस्था—ये सभी तत्व सनातन परंपरा में 108 के आध्यात्मिक महत्व को जीवंत रूप में दर्शाते हैं।
🔹 GI टैग से ODOP तक की यात्रा
गुलाबी मीनाकारी को GI टैग मिलना इसकी मौलिक पहचान की आधिकारिक स्वीकृति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना में शामिल कर के कारीगरों को संस्थागत समर्थन दिया। प्रशिक्षण, डिजाइन नवाचार, सरकारी प्रदर्शनियों और प्रोटोकॉल गिफ्टिंग के माध्यम से इस कला को नया बाजार और वैश्विक पहचान मिली है।
🔹 16वीं सदी से चली आ रही काशी की पहचान
गुलाबी मीनाकारी भारत में 16वीं सदी में आई और धीरे-धीरे काशी की विशिष्ट पहचान बन गई। इस कला में मेटल ऑक्साइड से तैयार रंगों का उपयोग होता है और मीनाकारी केवल शुद्ध चांदी व सोने पर की जाती है। लगभग 800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पकाई जाने वाली यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल और श्रमसाध्य होती है। पीढ़ियों से कारीगर परिवार इस विरासत को सहेजते आ रहे हैं, जो आज आधुनिक स्वरूप में भी जीवित है।
यह भेंट काशी की कला, सनातन आस्था और आत्मनिर्भर भारत की सोच को एक सूत्र में पिरोती हुई, एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देश के सामने आई है।
— रॉयल शाइन टाइम्स

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