वाराणसी दरोगा थप्पड़ विवाद: दो पक्ष, दो कहानियाँयुवक ने लगाए मारपीट व धमकी के आरोप, पुलिस ने बताया ड्यूटी के दौरान हमला

वाराणसी। मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान दरोगा से कथित मारपीट और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर भाजपा पार्षद के पुत्र हिमांशु श्रीवास्तव ने पुलिस पर मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं पुलिस इसे ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी पर हमले का मामला बता रही है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

युवक का आरोप: “पैर पकड़कर माफी मांगी, फिर भी पीटा गया”

कबीरचौरा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि वह पड़ोस के एक बुजुर्ग के दाह संस्कार में शामिल होने मणिकर्णिका घाट गया था। चिता में आग लगने के बाद लौटते समय सतुआ बाबा आश्रम मार्ग के पास भारी भीड़ में फंस गया।

हिमांशु के अनुसार, बाइक निकालने के लिए उसने दरोगा अभिषेक त्रिपाठी से विनम्रता से अनुरोध किया, लेकिन पीछे की ओर ढकेले जाने से वह ढलान पर गिरते-गिरते बचा और संतुलन के लिए दरोगा की जैकेट पकड़ ली। आरोप है कि इससे नाराज़ होकर दरोगा ने गालियां दीं और मारपीट शुरू कर दी। भीड़ में मौजूद कुछ अन्य लोगों ने भी उसे गिराकर पीटा।

हिमांशु का कहना है कि बचाव के दौरान उसका हाथ दरोगा को लग गया, जिसे थप्पड़ बताकर मामला बना दिया गया। उसने पैर पकड़कर माफी मांगी और CRPF फिजिकल टेस्ट की जानकारी देते हुए करियर खराब होने की दुहाई दी, लेकिन आरोप है कि उसे कॉलर पकड़कर बाहर निकाला गया और धमकी दी गई— “अब तुम्हारा करियर खराब कर दूंगा।” इसके बाद थाने ले जाकर कथित तौर पर अपमानित किया गया। तबीयत बिगड़ने पर देर रात अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पिता का पक्ष: “बेटे से पूछते ही भड़के, धाराएं लगाईं”

हुकुलगंज से भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास्तव ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बाइक नो-एंट्री में ले जाने का आरोप गलत है। उनका कहना है कि बेटे ने केवल रास्ता पूछा था, इसी दौरान धक्का दिया गया और भीड़ ने पीट दिया। उन्होंने दावा किया कि वे बेटे की ओर से माफी मांगने भी गए, बावजूद इसके गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिससे बेटे का भविष्य संकट में पड़ गया है।

पुलिस का पक्ष: “नो-व्हीकल जोन में रोकने पर किया हमला”

चौक थाने में तैनात दरोगा अभिषेक त्रिपाठी का कहना है कि नए साल पर लागू डायवर्जन के तहत वे सतुआ बाबा आश्रम मार्ग पर ड्यूटी कर रहे थे। नो-व्हीकल जोन में बाइक से आए तीन युवकों को रोका गया, जिस पर युवक ने खुद को पार्षद का बेटा बताते हुए थप्पड़ मार दिया। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर स्थानीय लोगों ने युवक को पकड़ लिया और भीड़ से बचाने के लिए उसे साइड में किया गया। बाद में थाने लाकर विधिक कार्रवाई की गई और मेडिकल परीक्षण कराया गया।

अस्पताल में भर्ती, बढ़ी राजनीतिक हलचल

हिमांशु की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे कबीरचौरा अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस कस्टडी में जमीन पर बैठाए रखने से उसकी हालत खराब हुई। घटना के बाद चौक थाने पर भाजपा पदाधिकारियों और समर्थकों का जमावड़ा भी देखने को मिला।

आगे क्या?

अब इस पूरे प्रकरण में CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट अहम भूमिका निभाएंगे। दो विपरीत दावों के बीच सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग लगातार उठ रही है।

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